*जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर में मां आदिशक्ति के प्रति श्रद्धा, भक्ति और विश्वास की अनूठी परंपरा एक बार फिर चर्चा में है। गढ़ा फाटक स्थित काली धाम में विराजमान मां महाकाली के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2047 तक प्रतिमा स्थापना के लिए निछावर स्वरूप दी जाने वाली निर्माण की मूल राशि की बुकिंग पहले ही पूरी हो चुकी है। यह अपने आप में मां महाकाली के प्रति भक्तों की गहरी आस्था और श्री वृहत महाकाली महोत्सव समिति के प्रति उनके विश्वास का विशिष्ट उदाहरण है।श्री वृहत महाकाली महोत्सव समिति, काली धाम गढ़ा फाटक द्वारा मां महाकाली की आराधना और प्रतिमा स्थापना की परंपरा श्रद्धा एवं धार्मिक उत्साह के साथ आगे बढ़ाई जा रही है। नवरात्रि के अवसर पर मां के दर्शन के लिए उमड़ने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ और आयोजन के प्रति लोगों का समर्पण इस धार्मिक परंपरा की व्यापक लोकप्रियता को दर्शाता है।
2047 तक की बुकिंग, आस्था का अद्भुत प्रमाण
प्रतिमा स्थापना के लिए निछावर के रूप में दी जाने वाली निर्माण की मूल राशि की बुकिंग वर्ष 2045 तक हो जाना इस बात का प्रमाण है कि श्रद्धालु इस आयोजन से जुड़ने के लिए वर्षों पहले से अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर रहे हैं। मां महाकाली के प्रति भक्तों का यह समर्पण धार्मिक आयोजन को केवल एक उत्सव तक सीमित नहीं रखता, बल्कि इसे पीढ़ियों से चली आ रही आस्था, परंपरा और सामूहिक सहभागिता का केंद्र बनाता है।श्री वृहत महाकाली महोत्सव समिति, काली धाम गढ़ा फाटक के आयोजन से जुड़ी यह विशेषता जबलपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी रेखांकित करती है। मां के प्रति श्रद्धालुओं का विश्वास और आयोजन में उनकी भागीदारी इस परंपरा को निरंतर मजबूती प्रदान कर रही है।नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दुर्गा और महाकाली की आराधना के बीच काली धाम गढ़ा फाटक की यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है। वर्ष 2045 तक प्रतिमा निर्माण की मूल राशि की बुकिंग पूरी होना महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि मां के भक्तों की अटूट श्रद्धा और धार्मिक परंपरा के प्रति उनके समर्पण की कहानी है।