जबलपुर । जिले में डॉग बाइट की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। आवार श्वानों के काटने की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। इससे नागरिकों का जीवन खतरे में पड़ा है। इसके बावजूद भी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत स्ट्रीट डॉग पर नियंत्रण करने की कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो रही है, न ही इस संबंध में निश्चित एक्शन प्लान बनाया गया है।
लिहाजा सुप्रीम कोर्ट से मदद की दरकार की गई। इस आशय का एक पत्र नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे तथा रजत भार्गव ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई ) को लिखा है। पत्र की प्रतिलिपि जबलपुर के महापौर, कलेक्टर व नगर निगम आयुक्त को भी भेजी गई है।
पत्र में कहा गया है कि नेशनल रैबिज कन्ट्रोल प्रोग्राम की वर्ष 2025 की रिपोर्ट में बताया है कि इन्दौर में जनवरी से जून के बीच 30 हजार 304 डॉग बाइट के केसेस हुए। जबलपुर में इन 6 महीनों में 13 हजार 619 केसेस रिकार्ड हुए है। स्पष्ट है कि डॉग बाइट के संबंध में जबलपुर मध्यप्रदेश में दूसरे नम्बर पर है।
इससे चिंतित होकर जबलपुर के महापौर, नगर निगम आयुक्त तथा कलेक्टर से चर्चा कर उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करने हेतु कई बार निवेदन किया गया। किन्तु कोई भी कार्यवाही नहीं की गई। स्थिति यह है कि नोडल अधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई, स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैण्ड आदि सार्वजनिक स्थानों में आवारा श्वान घूम रहे है। श्वानों की नसबंदी, टीकाकरण कार्य में सुस्ती है। यहा तक की पिछले कई वर्षों में श्वानों के संख्या की गिनती तक नहीं हुई है।
डॉ. पी.जी. नाजपांडे तथा रजत भार्गव ने बताया कि डॉग बाइट की बढ़ती संख्या से चिंतित होकर उन्होंने म.प्र. हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करने हेतु निर्देश देने की प्रार्थना की थी। लेकिन चूंकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है इसलिए हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इंकार किया है। अतः हाईकोर्ट से याचिका वापिस ली गई है।