जबलपुर, । शहर में पूर्व में हुई भीषण गैस दुर्घटनाओं के बावजूद प्रशासन की सुस्ती आम नागरिकों की जान पर भारी पड़ रही है। ग्राहक दक्षता कल्याण फाउंडेशन के मध्य प्रदेश राज्य प्रमुख संदीप गुप्ता ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए जिला प्रशासन और खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
विस्फोटक विभाग (पीईएसओ) और जिला प्रशासन के आदेशों की अनदेखी………
फाउंडेशन के कार्यकारी संचालक शुभम रंगारी ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि ”साक्ष्यों के साथ शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर संज्ञान लेते हुए संयुक्त मुख्य विस्फोटक नियंत्रक कार्यालय (भारत सरकार), भोपाल ने दिनांक 27 अक्टूबर 2025 को पत्र क्रमांक पी.36 (1) शिकायत/पेट्रोलियम के माध्यम से जबलपुर जिला प्रशासन को 202 होटल और रेस्टोरेंट में घरेलू गैस सिलेंडरों के भारी मात्रा में हो रहे अवैध उपयोग को रोकने हेतु निर्देशित किया था। इसी क्रम में 11 फरवरी 2026 को कलेक्टर कार्यालय (खाद्य शाखा) द्वारा जांच दल (आदेश क्रमांक/182/खाद्य/2025-26) का गठन भी किया गया। लेकिन विडंबना देखिए कि इतने समय बाद भी एक भी अवैध रिफिलिंग सेंटर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 50 रुपये की बढ़ोतरी के बाद शहर में ‘अल्टी-पल्टी’ (गैस ट्रांसफर) का अवैध कारोबार और घरेलू सिलेंडरों का होटलों में उपयोग दोगुना हो गया है। प्रशासन की यह चुप्पी किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।”
राष्ट्रीय स्तर पर उठाई जाएगी आवाज……..
संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन सोलंके ने भी इस मुद्दे पर अपनी स्पष्ट भूमिका रखी है। उन्होंने कहा कि जब भारत सरकार का विस्फोटक विभाग (पीईएसओ) इस खतरे की पुष्टि कर चुका है, तो स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता असहनीय है। यदि स्थानीय प्रशासन जल्द ही अधारताल, गोरखपुर और रांझी जैसे क्षेत्रों में गठित टीमों के माध्यम से सक्रिय छापेमारी नहीं करता है, तो फाउंडेशन इस विषय को दिल्ली स्तर पर उच्च अधिकारियों और मंत्रालय के समक्ष उठाएगा।
मुख्य मांगें………..
गठित टीमें केवल फाइलों तक सीमित न रहकर तत्काल प्रभाव से संवेदनशील क्षेत्रों में फील्ड पर उतरें। पीईएसओ के निर्देशों का पालन: विस्फोटक विभाग द्वारा चिन्हित 202 होटलों/रेस्टोरेंट पर तुरंत कार्रवाई कर अवैध रिफिलिंग करने वालों और घरेलू गैस का व्यावसायिक उपयोग करने वाले प्रतिष्ठानों पर भारी जुर्माना और एफआईआर दर्ज की जाए। प्रशासन सार्वजनिक करे कि 11 फरवरी के आदेश के बाद अब तक कितनी दुकानों या केंद्रों की जांच की गई है।