एनालॉग पनीर पर रोक सस्ता पनीर बेचकर उपभोक्ताओं को छलने वालों पर कसेगा शिकंजा,

जबलपुर। सस्ते के नाम पर लोगों की थाली तक पहुंच रहे एनालॉग पनीर पर अब मध्यप्रदेश में रोक लगा दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में इसके उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए। इसका सीधा असर जबलपुर के होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन, कैटरिंग कारोबार और पनीर की थोक-खुदरा बिक्री पर पड़ेगा।एनालॉग पनीर असली दूध से बने पनीर का सस्ता विकल्प है। इसे तैयार करने में दूध के साथ या उसकी जगह वनस्पति वसा, स्टार्च और दूसरी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। कम कीमत के कारण यह बाजार में तेजी से पैर पसार रहा है। अब सरकार के आदेश के बाद जबलपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना होगी कि बाजार में बिक रहा पनीर वास्तव में दूध से बना है या फिर एनालॉग पनीर को असली पनीर बताकर बेचा जा रहा है।

होटल-रेस्टोरेंट से लेकर शादियों तक जांच की जरूरत

जबलपुर में पनीर की खपत केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है। शहर के होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग संचालक और शादी समारोहों में बड़े पैमाने पर पनीर की खपत होती है। ऐसे में प्रतिबंध के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग को केवल दुकानों तक कार्रवाई सीमित रखने के बजाय थोक विक्रेताओं, सप्लायरों, होटल-रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबारियों तक सप्लाई चेन की जांच करनी होगी।

सरकार के मुताबिक प्रदेश में एनालॉग पनीर की रोजाना आवक और बिक्री करीब 300 से 400 क्विंटल होने का अनुमान है। यानी महीने में इसकी खपत करीब 9 हजार से 12 हजार क्विंटल तक पहुंचती है। जबलपुर में इसकी वास्तविक खपत का आंकड़ा सामने आने के बाद ही पता चलेगा कि प्रतिबंध का स्थानीय बाजार पर कितना असर पड़ेगा।

सस्ते के खेल में गुणवत्ता से समझौता?

एनालॉग पनीर की कम कीमत कारोबारियों के लिए आकर्षण का कारण है। दूध से बने पनीर की तुलना में सस्ता होने के कारण इसका इस्तेमाल बड़े आयोजनों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में लागत घटाने के लिए किया जा सकता है। सवाल यह है कि यदि इसे बिना स्पष्ट जानकारी के असली पनीर बताकर ग्राहक को परोसा या बेचा जा रहा है तो उपभोक्ता के साथ यह सीधा धोखा है।

अब जबलपुर में खाद्य विभाग को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्रतिबंध केवल कागजों तक न रहे। शहर के प्रमुख बाजारों, डेयरी प्रतिष्ठानों और होटल-रेस्टोरेंट में नमूने लेकर जांच की जाए और जहां एनालॉग पनीर मिले, वहां स्रोत तक पहुंचकर कार्रवाई हो।

मुख्यमंत्री का जोर—दूध से बनेगा प्राकृतिक पनीर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है और प्राकृतिक रूप से दुग्ध उत्पादन बढ़ाकर उसी से पनीर तैयार किया जाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद अब निगाह जबलपुर के खाद्य सुरक्षा अमले पर रहेगी कि वह आदेश को जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू करता है।

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