नहरों के रास्ते बदहाल, खेतों तक कैसे पहुंचेंगी पराली निस्तारण की मशीनें….?, बरगी बांध की नहरों के किनारे गड्ढे और झाड़ियों का कब्जा, सिमरिया-भर्रा में किसानों की मुश्किलें बढ़ीं


जबलपुर। धान की कटाई के बाद पराली निस्तारण को लेकर किसानों के सामने नई मुसीबत खड़ी हो गई है। शासन पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को जागरूक करने और वैकल्पिक व्यवस्था की बात कर रहा है, लेकिन खेतों तक पराली निस्तारण की मशीनें पहुंचाने वाले रास्तों की बदहाली दूर करने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। बरगी बांध की नहरों के किनारे बने रास्तों पर बड़े-बड़े गड्ढे, खाइयां और झाड़ियां होने से भारी कृषि मशीनों की आवाजाही मुश्किल हो गई है। ऐसे में किसानों का सवाल है कि जब बेलर मशीन, बड़े ट्रैक्टर, ट्रॉला और हार्वेस्टर खेतों तक पहुंच ही नहीं पाएंगे, तो पराली का निस्तारण कैसे होगा? किसानों ने चेतावनी दी है कि समय रहते रास्ते ठीक नहीं कराए गए तो आगामी रबी फसल की बोवनी के लिए खेत तैयार करने के दबाव में पराली जलाना उनकी मजबूरी बन सकता है।

रास्ते ही नहीं, तो मशीनें खेतों तक कैसे पहुंचेंगी?…..

नर्मदा घाटी परियोजना के अंतर्गत बरगी बांध की सिमरिया-भर्रा क्षेत्र की नहरों के किनारे बने रास्तों की स्थिति किसानों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। किसानों के मुताबिक, इन रास्तों पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, खाइयां और झाड़ियां होने से आवागमन तक कठिन है। वर्षों से मरम्मत नहीं होने के कारण कई हिस्सों में रास्ते बेहद खराब हो चुके हैं। इन परिस्थितियों में ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, ट्रॉला और पराली के बंडल बनाने वाली बेलर मशीनों को खेतों तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण है।
किसानों का कहना है कि वे निजी कंपनियों और उपलब्ध कृषि संसाधनों की मदद से पराली निस्तारण कराने को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए जरूरी बुनियादी सुविधा ही उपलब्ध नहीं है। यदि मशीनें खेतों तक नहीं पहुंचेंगी, तो पराली प्रबंधन की योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी।

बजट आवंटन के बावजूद मरम्मत पर सवाल………

ग्राम भर्रा के प्रगतिशील कृषक एवं वरिष्ठ नागरिक रामकिशन पटेल, लक्ष्मण पटेल, मणिशंकर रजक और सुरेंद्र तिवारी सहित अन्य किसानों ने बताया कि सिमरिया से भर्रा क्षेत्र की जल वितरण नहरों के किनारे बने रास्ते लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हैं। उनका आरोप है कि नहरों की साफ-सफाई और रास्तों की मरम्मत नियमित रूप से नहीं हो रही है।
किसानों ने सवाल उठाया कि जल उपभोक्ता समितियों को रखरखाव के लिए बजट आवंटित होने के बावजूद जमीनी स्तर पर काम दिखाई क्यों नहीं देता। उनका कहना है कि नहरों के किनारे की जमीन गांवों में आवागमन का महत्वपूर्ण और निर्विवाद रास्ता है। इसके बावजूद मनरेगा के तहत मिट्टी भराव और मरम्मत जैसे कार्य भी नहीं कराए गए। किसानों ने संबंधित विभागों से खर्च और कार्यों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

पराली जलाने पर कार्रवाई से पहले व्यवस्था दे प्रशासन…..

भारत कृषक समाज ने कहा है कि पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को केवल निर्देश और दंड का भय दिखाना पर्याप्त नहीं है। प्रशासन को पहले पराली निस्तारण के लिए आवश्यक मशीनों, परिवहन और खेतों तक पहुंचने वाले रास्तों की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। संगठन का कहना है कि यदि प्रशासनिक उदासीनता के कारण किसानों को वैकल्पिक साधन उपलब्ध नहीं हो पाते, तो ऐसी परिस्थितियों में किसानों पर दंडात्मक कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। संगठन ने यह भी चेतावनी दी कि किसानों की व्यावहारिक समस्याओं की अनदेखी जारी रही, तो वे संगठित होकर विरोध करने के लिए मजबूर होंगे।

नवागत कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग………

भारत कृषक समाज ने नवागत कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा से मामले को गंभीरता से लेते हुए बरगी बांध की नहरों के दोनों किनारों के रास्तों का निरीक्षण कराने और तत्काल मरम्मत शुरू कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि धान कटाई का समय नजदीक होने के कारण कार्रवाई में देरी सीधे रबी की बोवनी और पराली प्रबंधन को प्रभावित कर सकती है। इसलिए प्रशासन, नहर विभाग और संबंधित एजेंसियों को समन्वय बनाकर रास्तों को मशीनों की आवाजाही के योग्य बनाना चाहिए, ताकि किसान समय पर खेत तैयार कर सकें और पराली जलाने की नौबत भी न आए।