जबलपुर- श्री रामलीला समिति गढ़ा जबालीपुरम के सिद्ध मंच पर 60वें रामलीला महोत्सव के दसवें दिवस लीला का शुभारंभ समिति संचालक पं. अशोक मनोध्याय, अध्यक्ष एवं निर्देशक राजेश मिश्रा, महामंत्री एडवोकेट अरुण दीक्षित, लोकराम कोरी, रमाशंकर कटारे, राजेन्द्र प्यासी, डॉ. भूपेन्द्र उपाध्याय, भोलाराम अत्री, हरीश मनोध्याय, नीलेश चौबे, राकेश पाठक, राजेश नेमा, हनुमंत सिंह रघुवंशी, कैलाश नेमा, विजय नेमा, पंकज अवस्थी, संजय तिवारी, अशोक बघेल ‘दादाभाई’ एवं नीरज दूबे,कमलेश तिवारी, द्वारा भगवान श्रीराम की आरती के साथ हुआ।
रावण से युद्ध करते हुए घायल जटायु को भगवान श्रीराम ने गोद में उठाया और उन्हें पिता समान सम्मान देते हुए अपने परम धाम में स्थान दिया। इस प्रसंग ने त्याग, समर्पण और प्रभु की करुणा का संदेश दिया।इसके बाद शबरी की नवधा भक्ति का भावपूर्ण मंचन हुआ। गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए वर्षों से प्रभु श्रीराम की प्रतीक्षा कर रहीं शबरी को जब भगवान ने दर्शन दिए, तो उनका जीवन धन्य हो गया। शबरी के भक्ति संबंधी प्रश्न पर भगवान श्रीराम ने नवधा भक्ति के नौ स्वरूपों का वर्णन किया। शबरी के प्रेम, समर्पण और अटूट विश्वास ने दर्शकों को भक्ति की महिमा से परिचित कराया।
मित्र धर्म निभाकर श्रीराम ने किया बाली का वध…
शबरी के बताए मार्ग पर भगवान श्रीराम पंपापुर पहुंचे, जहां हनुमान जी ने उनकी भेंट सुग्रीव से कराई और अग्नि को साक्षी मानकर दोनों की मित्रता संपन्न हुई। अपने भाई बाली से प्रताड़ित सुग्रीव को भगवान श्रीराम ने न्याय दिलाने का वचन दिया। मित्र धर्म का पालन करते हुए प्रभु श्रीराम ने अत्याचारी बाली का वध किया और उसे भी अपने परम धाम पहुंचाया।इसके पश्चात सुग्रीव के राज्याभिषेक के साथ माता सीता की खोज की तैयारी प्रारंभ हुई। सुग्रीव ने चारों दिशाओं में वानर दल भेजे। दक्षिण दिशा में रामदूत हनुमान के नेतृत्व में वानर सेना को रवाना किया गया। प्रभु श्रीराम का कार्य पूर्ण करने के संकल्प के साथ हनुमान जी के प्रस्थान के प्रसंग ने मंच पर उत्साह और भक्तिभाव का संचार किया।
पं. अशोक मनोध्याय को ‘मानसमणि अलंकरण’ से सम्मानित….
रामलीला महोत्सव के दौरान संस्कारधानी की साहित्यिक संस्था ‘समवेत स्वर’ द्वारा धार्मिक एवं आध्यात्मिक क्षेत्र में अनवरत 60 वर्षों से श्रीरामलीला मंचन में विशिष्ट योगदान के लिए समिति संचालक पं. अशोक मनोध्याय का शाल-श्रीफल भेंटकर ‘मानसमणि अलंकरण’ से सम्मान किया गया।
सम्मान समारोह में संयोजक पं. तिवारी ने स्वागत अभिव्यक्ति दी। इस अवसर पर डॉ. संदीप नेमा, आशुतोष तिवारी, सुनीता तिवारी, राजेश पाठक ‘प्रवीण’, संध्या जैन ‘श्रुति’, संतोष तिवारी, राजेन्द्र मिश्रा, आई.पी. गोस्वामी, मनीषा संतोष सोनी, जी.डी. अग्रवाल, सुदेश श्रीवास्तव, कृष्णकांत अग्रवाल एवं सौरभ राठौर सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सम्मान के प्रत्युत्तर में पं. अशोक मनोध्याय ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर समिति के मुकेश मिश्रा, नरेश मिश्रा, विनायक तिवारी, डॉ. नीना उपाध्याय, इंदुलता प्यासी, सुधा यादव, विद्या केवट, दीपक कोष्टा, जितेन्द्र सोनी, राजा पांडे, राकेश मिश्रा एवं प्रहलाद बिलथरे सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
आज होगा लंका दहन और विभीषण शरणागति का मंचन
शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को लंका दहन, विभीषण शरणागति एवं लंका पर चढ़ाई जैसे रोमांचक और भक्तिपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। समिति ने समस्त रामभक्तों एवं धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में सिद्ध मंच पर पहुंचकर भगवान श्रीराम की दिव्य लीलाओं का आनंद लेने की अपील की है।