बिजली उत्पादक कोयले पर जीएसटी में राहत नहीं, उपभोक्ताओं में आक्रोश, पूर्व में 5 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत किया था जीएसटी, कटौती की उम्मीदों पर फिरा पानी; फ्यूल सरचार्ज में भी हुई बढ़ोत्तरी


जबलपुर। बिजली उपभोक्ताओं को जीएसटी परिषद की बैठक से राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन 8 अक्टूबर को हुई बैठक में बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कोयले पर जीएसटी में कटौती नहीं किए जाने से उपभोक्ताओं और जनसंगठनों में नाराजगी है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने निर्णय पर असंतोष जताते हुए केंद्र सरकार से कोयले पर जीएसटी की दोबारा समीक्षा करने की मांग की है।
मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने कहा कि बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कोयले पर पहले 5 प्रतिशत जीएसटी लगता था, जिसे बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया था। उम्मीद थी कि जीएसटी परिषद की बैठक में इसे फिर से घटाकर 5 प्रतिशत किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे बिजली उत्पादन की लागत कम होने और उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावनाओं को झटका लगा है।

बिजली उत्पादन लागत घटाने का दावा साबित नहीं हुआ……..

डॉ. नाजपांडे के अनुसार, 11 सितंबर 2025 को आयोजित जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में कोयले पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाने के साथ प्रति टन 400 रुपये का मुआवजा उपकर हटाने का निर्णय लिया गया था। कोयला मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इस बदलाव से बिजली उत्पादन की लागत में लगभग 17 से 18 पैसे प्रति यूनिट की कमी आने की उम्मीद थी। हालांकि, मंच का कहना है कि वर्ष 2025-26 में बिजली सस्ती होने के बजाय बिजली की दरों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली। ऐसे में कोयले पर कर व्यवस्था में बदलाव से उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत मिलने के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

फ्यूल सरचार्ज में भी हुई बढ़ोतरी…………

मंच ने बिजली बिलों में लगने वाले ईंधन समायोजन अधिभार यानी फ्यूल सरचार्ज में वृद्धि का मुद्दा भी उठाया। डॉ. नाजपांडे के अनुसार, बिजली दर निर्धारण के फार्मूले में बिजली उत्पादक कोयले की लागत को भी शामिल किया जाता है। जनवरी 2026 में फ्यूल सरचार्ज 1.58 प्रतिशत था, जो सितंबर में बढ़कर 5.06 प्रतिशत हो गया। इस प्रकार इसमें 3.46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
मंच का कहना है कि एक ओर बिजली उत्पादन की लागत घटने की उम्मीद जताई गई थी, वहीं दूसरी ओर फ्यूल सरचार्ज में बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

सरकार से दोबारा समीक्षा की मांग…………

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने मांग की है कि बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कोयले पर जीएसटी की दर की दोबारा समीक्षा की जाए। मंच के अनुसार, कर व्यवस्था में ऐसा बदलाव होना चाहिए, जिससे बिजली उत्पादन की लागत में वास्तविक कमी आए और उसका लाभ आम उपभोक्ताओं को मिल सके।
इस संबंध में आयोजित बैठक में रजत भार्गव, टी.के. रायचंदानी, एडवोकेट वेदप्रकाश अधोलिया, सुभाष चंद्रा, सुशीला कनौजिया, संतोष श्रीवास्तव, मनीष शर्मा, पी.एस. राजपूत, अशोक यादव, श्याम सोनलकर, के.सी. सोनी, घनश्याम सोनकर, एडवोकेट ब्रजेश साहू, प्रफुल्ल सक्सेना, के.एन. कमलाकर, दिलीप कुंडे और राममिलन शर्मा सहित अन्य लोग उपस्थित थे।