डीजे के शोर पर “बैठक वाला बैन” नहीं, अब चाहिए जमीन पर कार्रवाई, जबलपुर को “नो डीजे जिला” घोषित करने की मांग


जबलपुर। दशहरे की तैयारियों के बीच डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध की घोषणा एक बार फिर बैठकों में गूंज रही है, लेकिन शहर की सड़कों पर इसकी हकीकत सब जानते हैं। इसी “कागजी प्रतिबंध” के खिलाफ मंगलवार को नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच सहित कई जन संगठनों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपकर जबलपुर को “नो डीजे जिला” घोषित करने की मांग उठाई।

बैठकों में प्रतिबंध, सड़कों पर तांडव…..

दशहरे से पहले प्रशासन ने लाइट-साउंड संचालकों की बैठक लेकर तैयारियों की समीक्षा की और डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध रहने की बात कही। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जबलपुर में हर बार प्रतिबंध की घोषणा सिर्फ बैठकों तक सीमित रह जाती है। घोषणा करने वाले अधिकारी मैदान में इसे लागू नहीं करा पाते, और पुलिस की नाक के नीचे डीजे का शोर तांडव मचाता रहता है।

हार्ट अटैक के मामले बढ़े……….

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के प्रांताध्यक्ष डॉ पीजी नाजपांडे ने कहा कि डीजे के भारी शोर से हार्ट अटैक क मामले बढ़ गए हैं, यहां तक कि गर्भस्थ शिशुओं पर विपरीत परिणाम हो रहे हैं| अत: कानफोडू शोर कराने के आरोप में डीजे लगाने वालों पर हत्या की कोशिश का मामला दर्ज हो|
आज नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, भारतीय वरिष्ठ नागरिक एसोसिएशन, सीनियर सिटीजन वेलफेयर संघ, महिला समिति, पेंशनर्स समाज आदि संगठनों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन कर एसपी को ज्ञापन सौंपा| ज्ञापन में मांग की गई है कि उल्लंघन होने पर कार्रवाई केवल डीजे संचालक तक सीमित न रहे, बल्कि आयोजन समितियों की भी बराबर जवाबदेही तय हो।

प्रमुख मांगें……

दुर्गा पंडालों के आसपास डीजे की धमाल पर रोक लगे।
विसर्जन जुलूस में बड़े ट्रकों पर भारी डीजे लेकर दर्जनों वाहनों के काफिले की परंपरा बंद हो।
प्रतिबंध तोड़ने पर आयोजकों और संचालकों, दोनों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
प्रशासन पहले ही दिन सख्ती दिखाए, क्योंकि एक बार कठोर कार्रवाई हो जाए तभी प्रतिबंध का असर दिखेगा।

साधु-संतों और नेताओं की भी परीक्षा……………….

संगठनों ने साफ कहा कि केवल पुलिस के भरोसे यह लड़ाई नहीं जीती जा सकती। शहर के मठ-मंदिरों के साधु-संतों और सभी दलों के राजनीतिक नेताओं को भी इस पर इच्छाशक्ति दिखानी होगी। उनका कहना है कि वोटों के लालच में डीजे पर कमर मटकाने और शोर मचाने वालों के सामने नेताओं को नरम नहीं पड़ना चाहिए।

अब नजर प्रशासन पर……..

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के साथ भारतीय वरिष्ठ नागरिक एसोसिएशन, सीनियर सिटीजन वेल्फेयर संघ, पेंशनर समाज और महिला समिति जैसे संगठनों के जुड़ने से यह मुद्दा अब आम नागरिकों की आवाज बनता दिख रहा है। दशहरे से पहले यह तय होगा कि प्रशासन का प्रतिबंध बैठक की फाइलों में दबा रहता है या विसर्जन जुलूसों में कानून का डंडा दिखता है।