जबलपुर| जबलपुर सदर की भव्यतम और प्राचीनतम रामलीलाओं में शुमार श्री धनुष यज्ञ रामलीला समिति के मंचन का श्रीगणेश सोमवार 05 अक्टूबर से होने जा रहा है। रामलीला समिति का ये गरिमामय 145 वां वर्ष है। रामलीला समिति इस वर्ष की लीला को और भी भव्य, दिव्य तथा नयनाभिराम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। रामलीला को जनसामान्य से जोड़ने और प्रभु चरित्र को जन-जन के हृदय में बसाने समिति के सदस्य प्राण प्रण से लगे हुए हैं।
जबलपुर के सदर क्षेत्र की श्री धनुष यज्ञ रामलीला का इतिहास भी बेहद गौरवशाली और प्राचीन है। गोविंदगंज रामलीला के बाद इसे जबलपुर की सबसे पुरानी और प्रमुख रामलीलाओं में से एक माना जाता है।
इस ऐतिहासिक रामलीला की शुरुआत वर्ष 1881 में हुई थी। इस वर्ष (अक्टूबर 2026 में) यह रामलीला अपने 145वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है।
श्री धनुष यज्ञ रामलीला सदर का गौरवशाली इतिहास……..
इस रामलीला की शुरुआत वर्ष 1881 में सदर क्षेत्र के प्रतिष्ठित और गणमान्य परिवारों द्वारा मिलकर की गई थी। शुरुआती दौर में शिवनारायण बाजपेयी और ईश्वरीप्रसाद तिवारी ने बड़ा साहस दिखाते हुए मिलिट्री/कैंटोनमेंट (सदर) इलाके में इसका मंचन शुरू करवाया था। इस पुनीत कार्य में नरसिंहदास अग्रवाल और नंदकिशोर मिश्र जैसे स्थानीय दिग्गजों ने अपना सक्रिय सहयोग दिया था।
गोविंदगंज की रामलीला (1865) के बाद सदर की यह धनुष यज्ञ रामलीला (1881) जबलपुर (संस्कारधानी) की
इस वर्ष श्री धनुष यज्ञ रामलीला की शुरुआत 5 तारीख विधिवत मुकुट पूजन एवं 6 तारीख को मुकुट पूजन जुलूस के साथ प्रारंभ हो जाएगी परंपराओं का निर्वहन होता रहे युवाओं और आने वाली पीढ़ी में प्रेरणा बनी रहे इस कारण तृतीय वर्ष भी मेरे द्वारा “रावण लंकेश’ का पाठ अभिनीत किया जावेगा
टीवी पर रामायण धारावाहिक शुरू हो जाने से लोगों में रामलीला के प्रति कुछ रुझान तब से कम जरूर हुआ है लेकिन आज भी हमारे बुजुर्ग एवं मातृशक्ति शानदार संवादों में भाव विभोर हो जाते हैं जबलपुर के सदर क्षेत्र की श्री धनुष यज्ञ रामलीला का इतिहास भी बेहद गौरवशाली और प्राचीन है।