जबलपुर। ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर प्रस्तावित 0.40 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर व्यापारिक संगठनों की चिंता के बीच 2 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘नो यूपीआई डे’ का आह्वान वापस ले लिया गया है। दिल्ली में देशभर के वरिष्ठ व्यापारिक नेताओं के प्रतिनिधिमंडल की केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया।चांदनी चौक से सांसद एवं कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल के नेतृत्व में करीब 20 वरिष्ठ व्यापारिक नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में वित्त मंत्री से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने प्रस्तावित एमडीआर को लेकर व्यापारियों की चिंताओं से उन्हें अवगत कराया।
प्रतिनिधिमंडल में कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया, ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स फेडरेशन के अध्यक्ष धैर्यशील पाटिल, ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन के चेयरमैन कैलाश लख्यानी तथा ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के अध्यक्ष पंकज अरोड़ा सहित विभिन्न व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी शामिल रहे।
प्रवीन खंडेलवाल के अनुसार, वित्त मंत्री के साथ हुई सकारात्मक एवं रचनात्मक चर्चा तथा व्यापारिक संगठनों की चिंताओं पर समुचित विचार किए जाने के आश्वासन के बाद एआईसीपीडीएफ और एआईएमआरए ने 2 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘नो यूपीआई डे’ का आह्वान वापस लेने का निर्णय लिया है।
बैठक में व्यापारिक नेताओं ने कहा कि डिजिटल भुगतान की बढ़ती गति और लोकप्रियता को बनाए रखना जरूरी है, लेकिन इसके साथ छोटे और मध्यम व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ना चाहिए। संगठनों ने यूपीआई और डिजिटल इंडिया अभियान के प्रति अपना समर्थन दोहराते हुए कहा कि उनका उद्देश्य डिजिटल भुगतान का विरोध करना नहीं, बल्कि ऐसी नीतियों की मांग करना है, जो व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों को ध्यान में रखें।
वित्त मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की चिंताओं को सुना और सरकार की ओर से डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के साथ सभी हितधारकों के हितों की रक्षा की प्रतिबद्धता जताई। व्यापारिक प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे पर संवाद बनाए रखने के लिए वित्त मंत्री और वित्त मंत्रालय का आभार व्यक्त किया।व्यापारिक संगठनों ने उम्मीद जताई कि सरकार और व्यापार जगत के बीच निरंतर संवाद के माध्यम से ऐसा व्यावहारिक समाधान निकलेगा, जिससे डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने के साथ देश के व्यापारियों और एमएसएमई क्षेत्र के हितों की भी रक्षा हो सके।कैट के संभागीय अध्यक्ष जबलपुर दीपक सेठी ने बताया कि व्यापारिक संगठनों की ओर से इस पूरे विषय पर आगे की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।