इन रोड नेटवर्क पर बनी सहमति जो विजन 2047 के मास्टर प्लान को पूर्णता प्रदान करेगी :
1. जबलपुर-वाराणसी ग्रीनफील्ड रोड
2. जबलपुर-नागपुर ग्रीनफील्ड रोड
3. जबलपुर-सागर-अशोक नगर रोड
4. जबलपुर-भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड रोड
5. जबलपुर-रायपुर ग्रीनफील्ड रोड
6. जबलपुर-आशापुर(खंडवा) रोड
भोपाल। लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी के नेतृत्व मे जबलपुर को देश के प्रमुख कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित करने की दिशा में एक साथ कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। आने वाले समय में जबलपुर को उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाले नए कॉरिडोर विकसित होंगे। इन सभी कॉरिडोर को जबलपुर की निर्माणाधीन रिंग रोड से जोड़कर एक ऐसा मजबूत सड़क नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, जो जबलपुर को राष्ट्रीय स्तर पर परिवहन, व्यापार और लॉजिस्टिक्स का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की क्षमता रखता है।
लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने कहा कि जबलपुर-वाराणसी मार्ग से जबलपुर को वाराणसी और प्रयागराज से सीधा संपर्क मिलेगा। जबलपुर-नागपुर मार्ग के माध्यम से जबलपुर समृद्धि महामार्ग (नागपुर-मुंबई) से जुड़ जाएगा और मुंबई, पुणे और गोवा के लिए सीधी कानेक्टिविटी प्राप्त होगी। जबलपुर-भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से जबलपुर, भोपाल और इंदौर एक मजबूत नेटवर्क में जुड़ेंगे और जबलपुर को दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) से सीधी कनेक्टिविटी प्राप्त होगी।
मंत्री श्री सिंह ने बताया कि जबलपुर-सागर-अशोकनगर फोरलेन मार्ग एवं सागर-कोटा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के माध्यम से जबलपुर को कोटा, जयपुर, उदयपुर तथा राजस्थान और गुजरात के प्रमुख क्षेत्रों से बेहतर संपर्क मिलेगा। इसी प्रकार जबलपुर-मंडला-चिल्पी-रायपुर फोरलेन मार्ग तथा जबलपुर-धूमा-रायपुर ग्रीनफील्ड मार्ग से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सीधा जुड़ाव मजबूत होगा। इन सभी मार्गों को जबलपुर रिंग रोड के माध्यम से आपस में जोड़कर हमारा प्रयास है कि जबलपुर को उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम दिशा के यातायात का प्रमुख केंद्र बनाया जाए।
मंत्री श्री सिंह ने यह भी बताया की लोक निर्माण विभाग के तहत सड़क विकास निगम करेगा इनमे से अनेक सड़कों का निर्माण। NHAI पर निर्भरता नहीं रहेगी।
विजन 2047 में शामिल वाराणसी-विशाखापट्टनम कॉरिडोर
वाराणसी-विशाखापट्टनम कॉरिडोर को विकसित भारत के विजन 2047 में शामिल किया गया है। इस लंबी दूरी के महत्वपूर्ण कॉरिडोर के प्रथम चरण में वाराणसी से नागपुर तक कनेक्टिविटी विकसित करने की तैयारी प्रारंभ हो गई है। प्रस्तावित वाराणसी-नागपुर मार्ग जबलपुर से होकर गुजरेगा।
इस कॉरिडोर के माध्यम से जबलपुर को उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण शहर वाराणसी से सीधी कनेक्टिविटी प्राप्त होगी। इसके साथ रीवा से प्रयागराज को स्पर कनेक्टिविटी देने की योजना भी प्रस्तावित है। इससे जबलपुर के साथ महाकौशल और विंध्य क्षेत्र को उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण आर्थिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों से बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा।
नागपुर की ओर यह कॉरिडोर जबलपुर को महाराष्ट्र से जोड़ेगा। नागपुर के माध्यम से आगे मुंबई, पुणे, गोवा, हैदराबाद और विशाखापट्टनम जैसे महत्वपूर्ण शहरों तथा औद्योगिक एवं बंदरगाह क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी के रास्ते खुलेंगे। इस प्रकार वाराणसी से नागपुर तक बनने वाला पहला चरण भविष्य में वाराणसी-विशाखापट्टनम के व्यापक नेटवर्क का आधार बनेगा।
श्री सिंह ने कहा कि जबलपुर का इस कॉरिडोर पर होना अपने आप में महत्वपूर्ण है। उत्तर में वाराणसी और प्रयागराज तथा दक्षिण में नागपुर और आगे विशाखापट्टनम जैसे महत्वपूर्ण केंद्रों से जुड़ाव जबलपुर को देश के उत्तर-दक्षिण आर्थिक गलियारे में महत्वपूर्ण स्थान प्रदान कर सकता है।
NHAI की कार्ययोजना में शामिल सागर-कोटा कॉरिडोर
जबलपुर को पश्चिमी भारत से जोड़ने के लिए सागर-कोटा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर NHAI की कार्ययोजना में शामिल है। इसके साथ जबलपुर-सागर मार्ग को फोरलेन करने की दिशा में भी तैयारी की जा रही है।
जबलपुर-सागर मार्ग और आगे प्रस्तावित सागर-कोटा कॉरिडोर के विकसित होने से जबलपुर की राजस्थान से सीधी और बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित होगी। कोटा के माध्यम से जयपुर, उदयपुर और राजस्थान के अन्य प्रमुख क्षेत्रों के साथ-साथ गुजरात की दिशा में भी बेहतर सड़क संपर्क प्राप्त होगा।
इस नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण लाभ यह भी होगा कि जबलपुर उत्तर-दक्षिण दिशा में विकसित हो रहे राष्ट्रीय सड़क नेटवर्क से और मजबूती से जुड़ सकेगा। इससे दिल्ली सहित उत्तर भारत की ओर जाने वाले यातायात के लिए भी बेहतर विकल्प उपलब्ध होंगे।
जबलपुर-भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर
जबलपुर को मध्य प्रदेश के दो प्रमुख आर्थिक केंद्रों भोपाल और इंदौर से जोड़ने के लिए जबलपुर-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की योजना तैयार की जा रही है। इसके अंतर्गत जबलपुर से भोपाल तक का मार्ग मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) द्वारा तथा भोपाल से इंदौर तक का मार्ग NHAI द्वारा विकसित किया जाना प्रस्तावित है।
इस बहुपयोगी परियोजना के पूरा होने पर जबलपुर, भोपाल और इंदौर तीनों प्रमुख शहर एक मजबूत और तेज कनेक्टिविटी नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। जबलपुर से इंदौर की दूरी भविष्य मे 4.5 घंटों मे तय की जा सकेगी। इसके साथ मार्ग के आसपास औद्योगिक क्षेत्रों, लॉजिस्टिक पार्क, वेयरहाउसिंग और अन्य आर्थिक गतिविधियों के विकास की व्यापक संभावनाएं बनेंगी।
इंदौर और उज्जैन के माध्यम से जबलपुर को दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) के नेटवर्क से भी बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी। इससे जबलपुर और महाकौशल क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने तथा उद्योगों के लिए बड़े बाजारों तक पहुंच आसान बनाने का अवसर मिलेगा।
MPRDC तैयार कर रहा है खंडवा (आशापुर) जबलपुर मार्ग की DPR
लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने कहा कि जबलपुर को देश के प्रमुख शहरों और आर्थिक केंद्रों से जोड़ने के लिए विभिन्न दिशाओं में नए कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। जबलपुर-भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के साथ खंडवा-जबलपुर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर भी महत्वपूर्ण परियोजना है, जिसकी डीपीआर MPRDC द्वारा तैयार की जा रही है। खंडवा के माध्यम से जबलपुर की पश्चिमी मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की दिशा में कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।
रिंग रोड और कॉरिडोर मिलकर बनाएंगे लॉजिस्टिक नेटवर्क
श्री राकेश सिंह ने कहा कि इन परियोजनाओं को अलग-अलग सड़क परियोजनाओं के रूप में देखने के बजाय एक समेकित कनेक्टिविटी नेटवर्क के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। उनका विजन है कि जबलपुर की भौगोलिक स्थिति और उपलब्ध कनेक्टिविटी का लाभ उठाते हुए इसे मध्य भारत के बड़े लॉजिस्टिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।
उन्होंने कहा कि जबलपुर में रिंग रोड और विभिन्न दिशाओं से आने वाले कॉरिडोर के मिलने से भविष्य में बड़े लॉजिस्टिक पार्क, वेयरहाउसिंग, कोल्ड स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट टर्मिनल, कृषि-प्रसंस्करण केंद्र और औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे केवल यातायात सुविधा बेहतर नहीं होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
जबलपुर के विकास को मिलेगी नई दिशा
श्री सिंह ने कहा कि जबलपुर को देश के केंद्र में स्थित शहर होने का लाभ मिलना चाहिए। लंबे समय से उनका प्रयास रहा है कि जबलपुर और महाकौशल क्षेत्र को केवल क्षेत्रीय सड़कों तक सीमित न रखते हुए राष्ट्रीय स्तर के बड़े सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाए। इसी सोच के अनुरूप विभिन्न कॉरिडोरों की योजना और उनके लिए आवश्यक समन्वय पर लगातार कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अच्छी सड़क केवल यात्रा को आसान नहीं बनाती, बल्कि वह उद्योग, रोजगार, व्यापार और निवेश का रास्ता भी खोलती है। जबलपुर को वाराणसी और प्रयागराज से लेकर नागपुर और विशाखापट्टनम तक, तथा कोटा, भोपाल और इंदौर से लेकर रायपुर तक बेहतर कनेक्टिविटी मिलने पर इसका सीधा लाभ महाकौशल के किसानों, व्यापारियों, उद्योगों और युवाओं को मिलेगा।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के माध्यम से जबलपुर के आसपास की आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी जा सकती है। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण जबलपुर में उत्पादन और भंडारण की सुविधाएं विकसित करने के साथ देश के विभिन्न हिस्सों में माल के वितरण का एक प्रभावी नेटवर्क तैयार किया जा सकेगा।
रायपुर से भी मजबूत होगा संपर्क
जबलपुर-मंडला-चिल्पी होकर रायपुर मार्ग को फोरलेन में उन्नयन करने की तैयारी भी चल रही है। इसके अतिरिक्त जबलपुर से धूमा-लखनादौन होते हुए रायपुर को ग्रीनफील्ड मार्ग से जोड़ने की कार्रवाई भी की जा रही है, जिसकी डीपीआर लगभग तैयार है।
इन परियोजनाओं से जबलपुर को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से बेहतर सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच व्यापार एवं परिवहन को गति मिलने के साथ भविष्य में रायपुर को दिल्ली से जोड़ने वाले व्यापक नेटवर्क को भी मजबूती मिलेगी।
महाकौशल के लिए नए आर्थिक अवसर
लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि इन सभी परियोजनाओं का लाभ केवल जबलपुर शहर तक सीमित नहीं रहेगा। महाकौशल के आसपास के जिलों को भी राष्ट्रीय बाजारों से बेहतर संपर्क मिलेगा। कृषि उत्पादों के परिवहन, पर्यटन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे।
उन्होंने कहा कि जबलपुर की रिंग रोड और उससे जुड़ने वाले ये कॉरिडोर आने वाले वर्षों में शहर के विकास की दिशा बदलने की क्षमता रखते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि सड़क कनेक्टिविटी के साथ लॉजिस्टिक और औद्योगिक विकास की भी समानांतर योजना बनाई जाए, ताकि सड़क परियोजनाओं का अधिकतम आर्थिक लाभ क्षेत्र को मिल सके।
श्री सिंह ने कहा कि जबलपुर को केवल एक शहर के रूप में नहीं, बल्कि उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम दिशा में जाने वाले यातायात को जोड़ने वाले राष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास है। वाराणसी-विशाखापट्टनम कॉरिडोर, सागर-कोटा कॉरिडोर, जबलपुर-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर और निर्माणाधीन रिंग रोड मिलकर जबलपुर के लिए भविष्य की ऐसी कनेक्टिविटी तैयार कर सकते हैं, जो आने वाले दशकों में इसके औद्योगिक और आर्थिक विकास की मजबूत आधारशिला बनेगी।