भोपाल/ सरकारी खरीद के लिए बनाए गए GeM पोर्टल पर प्रतिस्पर्धा का दिखावा कर कथित तौर पर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की वर्ष 2024 में हुई करीब 10.99 करोड़ रुपये की कंप्यूटर, प्रिंटर और UPS खरीद में गंभीर अनियमितताएं प्रथम दृष्टया सामने आई हैं। जांच के मुताबिक टेंडर में अलग-अलग कंपनियों के नाम से बोली लगाने वाली चार फर्मों के पीछे कथित तौर पर एक ही व्यक्ति का नियंत्रण था।EOW ने शिवम यादव और विनय रायकवार के आवेदनों पर प्राप्त शिकायत की जांच के बाद 1 सितंबर 2026 को रणधीर कुमार पटेल, हेमलता पटेल, अशोक कुमार सिंह, देवेंद्र सिंह सहित अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में अपराध क्रमांक 93/2026 दर्ज कर विवेचना शुरू की है।
चार फर्में, लेकिन मोबाइल नंबर और पता एक
जांच में EOW को फर्मों के बीच कथित मिलीभगत के कई संकेत मिले। जांच के अनुसार मेसर्स शांति ट्रेडर्स का मोबाइल नंबर मेसर्स साईबाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के मोबाइल नंबर से समान पाया गया। वहीं एच.टी.एम. इंडिया की ईमेल आईडी भी साईबाबा कंपनी के नाम से जुड़ी मिली। इतना ही नहीं, एच.टी.एम. इंडिया ने GST रिकॉर्ड में भोपाल के एमपी नगर का जो अतिरिक्त कार्यालय पता दर्ज कराया था, वह साईबाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का ही पता निकला।
EOW के अनुसार इन चारों फर्मों ने GeM के कई अन्य टेंडरों में भी एक साथ बोली लगाई थी। जांच में इनके बीच कीमतों में बेहद कम अंतर और बारी-बारी से अलग-अलग फर्मों को ठेका मिलने की बात सामने आई है।
अपनी ही फर्मों से मुकाबले का आरोप
जांच में एक अहम दस्तावेज भी सामने आया। शांति ट्रेडर्स ने 15 अक्टूबर 2024 को इसी टेंडर के संबंध में विभाग को अपने लेटरहेड पर पत्र दिया था। EOW ने इसे इस बात का महत्वपूर्ण साक्ष्य माना है कि कथित रूप से एक ही व्यक्ति से जुड़ी दूसरी फर्म ने अपने ही समूह की फर्म के खिलाफ अलग बोलीदाता के तौर पर प्रतिस्पर्धा का स्वरूप बनाया।
पुराने कंप्यूटर को नया बताकर देने का आरोप
मामले में सिर्फ टेंडर प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में नहीं है, बल्कि आपूर्ति किए गए कंप्यूटरों की गुणवत्ता और उम्र को लेकर भी गंभीर तथ्य सामने आए हैं। जांच के मुताबिक कंप्यूटर निर्माता कंपनी के वारंटी रिकॉर्ड में इन कंप्यूटरों के लगने की तारीख 22 जुलाई 2024 दर्ज थी, जबकि विभाग ने इनकी खरीद के लिए टेंडर बाद में, 23 सितंबर 2024 को किया था। EOW ने इसे पहले से इस्तेमाल किए जा चुके माल को नया बताकर आपूर्ति किए जाने का संकेत माना है।
विभागीय कमेटी द्वारा कंप्यूटर खोलकर जांच करने पर निर्धारित शर्तों से अलग RAM और Acer की जगह किसी स्थानीय कंपनी की SSD लगी होने की बात भी जांच में सामने आई। कमेटी ने साईबाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश भी की थी।
3,754 का UPS 11,247 रुपये में खरीदने का आरोप
इस पूरे मामले में UPS की खरीद सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बताई गई है। EOW की जांच के अनुसार जिस UPS की कीमत GeM पर 3,754 रुपये उपलब्ध थी, उसके लिए विभाग ने प्रति यूनिट 11,247 रुपये का भुगतान किया। यानी कीमत में बड़ा अंतर सामने आया।
निर्माता कंपनी Cyber Power ने भी कथित तौर पर बताया कि दस्तावेजों में दर्ज UT1200E मॉडल उसने इस टेंडर में उपलब्ध नहीं कराया था। जांच के अनुसार वास्तविक रूप से दूसरा मॉडल दिया गया था और कागजों में अलग मॉडल नंबर दर्ज किया गया।
फर्जी दस्तावेजों से लेकर महंगे भुगतान तक जांच का दायरा
EOW की जांच में चारों फर्मों की आपसी कड़ियों, अधिकृत विक्रेता होने के दावों, दस्तावेजों और सामान की वास्तविक स्थिति को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। सूरज इंटरप्राइजेज द्वारा Acer Veriton Z4694G मॉडल के लिए अधिकृत विक्रेता का दर्जा लेने के संबंध में भी जांच में विसंगति मिली।
फिलहाल EOW ने चारों आरोपियों एवं अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2), 318(4), 336(3) और 340(2) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना में लिया है। जांच अभी जारी है, इसलिए मामले में आगे और भी तथ्य सामने आने की संभावना है।नोट: खबर में आरोपों को “EOW की जांच में प्रथम दृष्टया सामने आया” के रूप में रखा गया है, ताकि समाचार में जांच के निष्कर्ष और अंतिम दोषसिद्धि के बीच अंतर स्पष्ट रहे।