श्रावणी में पंचगव्य प्राशन से होता है समस्त दोषों का क्षय : ब्रह्मचारी चैतन्यानंद जी

जबलपुर। श्रावण मास की पूर्णिमा के अवसर पर श्री बगलामुखी सिद्ध पीठ शंकराचार्य मठ में ब्रह्मचारी श्री चैतन्यानंद जी महाराज के परम सान्निध्य में ब्राह्मणों का महापर्व श्रावणी उपाकर्म विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। उपनीत द्विजों ने मां नर्मदा के तट स्थित जिलहरी घाट पर श्रावणी उपाकर्म की धार्मिक विधियां पूरी कीं। इसके बाद शंकराचार्य मठ में सप्तऋषि पूजन किया गया।ब्रह्मचारी श्री चैतन्यानंद जी महाराज ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म ब्राह्मण समाज का महत्वपूर्ण पर्व है। इस अवसर पर पंचगव्य प्राशन और हेमाद्रि संकल्प के माध्यम से वर्षभर में जाने-अनजाने में हुए दोषों के प्रायश्चित का विधान है। इसके बाद ऋषियों का पूजन कर नवीन यज्ञोपवीत धारण किया जाता है।उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष श्री बगलामुखी सिद्ध पीठ शंकराचार्य मठ में श्रावणी उपाकर्म की परंपरा निभाई जाती है और इसके बाद सभी विप्रजन रक्षाबंधन का पर्व मनाते हैं। इस धार्मिक आयोजन में दूर-दराज क्षेत्रों से भी ब्राह्मण शामिल होने के लिए पहुंचते हैं।श्रावणी उपाकर्म एवं सप्तऋषि पूजन में आचार्य राजेंद्र प्रसाद शास्त्री, पंडित पवन मिश्रा, पंडित शारदानंद द्विवेदी, आचार्य दिनेश गर्ग, पंडित गौरीशंकर तिवारी, पंडित कमलेश शास्त्री, टेकचंद शर्मा, ऋषि, हरिशंकर, पंडित सुशील, पंडित शशिकांत तिवारी, पंडित अखिल तिवारी, पंडित तुलसी अवस्थी, पंडित रमेश दुबे, पंडित दिनेश दुबे, पंडित अंकित दीक्षित, पंडित पीयूष दुबे, पंडित वैभव दुबे सहित आसपास के क्षेत्र के ब्राह्मणजन उपस्थित रहे।