जबलपुर, श्री बगलामुखी सिद्ध पीठ शंकराचार्य मठ, सिविक सेंटर मढ़ाताल, जबलपुर में आयोजित श्री शिव महापुराण ज्ञान यज्ञ एवं असंख्य रुद्री निर्माण (पार्थिव शिवलिंग) के क्रम में मंगलवार को भगवती का हिंडोला पूजन किया गया। इसके साथ ही भगवान हरिहरेश्वर महादेव एवं पार्थिव शिवलिंग का महारुद्राभिषेक और बिल्वपत्र अर्चन विधि-विधान से संपन्न हुआ।कथा व्यास पूज्य ब्रह्मचारी श्री चैतन्यानंद जी महाराज ने श्री शिव महापुराण की कथा में अर्धनारीश्वर स्वरूप की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि अर्धनारीश्वर भगवान शिव का अत्यंत महत्वपूर्ण स्वरूप है। यह स्वरूप पुरुष और प्रकृति, शिव और शक्ति के सामंजस्य तथा दोनों की परस्पर पूरकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पुरुष और स्त्री ऊर्जा के मिलन के बिना सृष्टि की कल्पना संभव नहीं है।
उन्होंने कथा प्रसंग सुनाते हुए बताया कि सृष्टि की रचना के बाद ब्रह्मा जी चिंतित हुए कि उनकी रचनाएं नष्ट हो जाएंगी और उन्हें बार-बार नई सृष्टि करनी पड़ेगी। समाधान न मिलने पर भगवान शिव ने अर्धनारीश्वर स्वरूप धारण कर ब्रह्मा जी को सृष्टि के रहस्य का बोध कराया।
ब्रह्मचारी जी ने पाशुपत व्रत की महिमा बताते हुए कहा कि यह व्रत केवल सांसारिक मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नहीं, बल्कि जीव को जन्म-मरण के बंधन से मुक्त करने के लिए भगवान शिव द्वारा प्रतिपादित किया गया है।
उन्होंने बताया कि श्री शिव महापुराण में वायुदेव ने नैमिषारण्य के ऋषियों को उपदेश देते हुए संसार के तीन प्रमुख तत्व—पाश, पशु और पशुपति—बताए हैं। अज्ञानता के वश में रहने वाले समस्त जीव ‘पशु’ कहलाते हैं। माया, मोह, अहंकार, क्रोध और कर्मों के बंधन को ‘पाश’ कहा गया है, जबकि इन समस्त बंधनों के स्वामी और नियंत्रक भगवान शिव ‘पशुपति’ हैं।
कथा में बताया गया कि जब ब्रह्मा सहित समस्त देवता भी माया के बंधन से व्याकुल हुए, तब उन्होंने भगवान शिव की शरण ली। भगवान शिव द्वारा बताए गए पाशुपत व्रत का श्रद्धापूर्वक अनुष्ठान करने के बाद देवताओं ने सांसारिक बंधनों से मुक्ति प्राप्त कर दिव्य शिवत्व को प्राप्त किया।
इस अवसर पर आचार्य राजेंद्र शास्त्री, श्रीमती माया सिंह, हर्षित तिवारी, सुभाष कुड़रा, आस्था, शिवेंद्र सिंह, पंडित विजय तिवारी, दुर्गा तिवारी, नीता पटेल, सुरेश कुरेले, सरिता कुरेले, अन्नपूर्णा नायकर, गोविंद साहू, अमित, प्रतीक्षा सिंह, ऋचा मिश्रा, मनोज सेन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।