जबलपुर। सेठ मन्नूलाल अस्पताल में मेजर हार्ट अटैक से जूझ रही 65 वर्षीय महिला की जान चिकित्सकों ने लगातार 35 इलेक्ट्रिक शॉक देकर बचाई। महिला की हालत बेहद गंभीर थी। उसका ब्लड प्रेशर रिकॉर्ड नहीं हो रहा था और हृदय की धड़कन बेहद तेज होकर वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन की स्थिति में पहुंच गई थी।अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रोफेसर अमल कांति सेन ने बताया कि मरीज को बचाने के लिए लगातार इलेक्ट्रिक शॉक दिए गए। आश्चर्यजनक रूप से महिला को सामान्य हृदय गति में लाने के लिए कुल 35 इलेक्ट्रिक शॉक देने पड़े। इसके बाद जांच में पता चला कि हृदय की मुख्य धमनी पूरी तरह बंद थी।इसके बाद मरीज को तत्काल कैथ लैब ले जाकर बंद धमनी को खोला गया और उसमें स्टेंट डाला गया। उपचार के बाद मरीज की हालत में तेजी से सुधार होने लगा। चिकित्सकों के मुताबिक, जिस स्थिति में महिला अस्पताल पहुंची थी, उसमें उसके बचने की संभावना बेहद कम थी, लेकिन उपचार के बाद वह महज तीन दिन में स्वस्थ होकर अस्पताल से पैदल चलकर घर गई।डॉ. अमल कांति सेन ने इस जटिल और सफल उपचार के केस को आईआईसी कॉन्फ्रेंस, मेदांता दिल्ली में प्रस्तुत किया। कॉन्फ्रेंस में मौजूद विशेषज्ञों और पूरे पैनल ने मरीज को बचाने के लिए किए गए चिकित्सकीय प्रयास की सराहना की।