जबलपुर -विश्वास के साथ जब आप किसी का हाथ पकड़ लेते हैं तो ऊबड़-खाबड़ रास्तों में भी निर्भीकता से चलते हैं। वैसे ही परमात्मा श्रीहरि पर पूर्ण रूप से विश्वास कर लिया तो जीवन में कभी भी कोई संकट बड़ा नहीं लगेगा,आप लगातार जीवन पथ पर अग्रसर होंगे।
गंगा सभी के पाप और आसुरी वृतियों को स्नान मात्र से नाश कर देती है। सभी के पापों को धोकर मैली हो जाती है लेकिन परमात्मा की भक्ति कर रहे संत महात्माओं के गंगा स्नान से गंगा पुनः पवित्र हो जाती है।
जीवन का सौभाग्य है कि संत महात्माओं की भूमि जबलपुर में हमारा जन्म हुआ है। सच्चे संत जब हम सभी को मिल जाते हैं तो हम व्यसनों से मुक्त होकर आत्मिक रूप से पूर्ण शुध्दिकरण हो जाता है।
हमें कोई भी परेशान नहीं कर सकता केवल हम अपने ही आंतरिक क्रोध लोभ मोह मद ही हमें परेशान कर सकते हैं संत और सत्संग ही आदमी को पूर्णतया स्वच्छ करते हैं।
भगवान और संत की कृपा से ही हमें क्रोध और व्यसनों से मुक्त करते हैं।
भगवान और संत की शरण में हम आंतरिक और व्यावहारिक रूप से पूर्ण स्वच्छ हो जाते हैं। सच्चे संत हमारे व्यसनों, दुर्व्यवहारों से मुक्ति दिलाते हैं।
जीवन मंत्र संत देते हैं कि लौकिक कर्म करते रहिए फल के लिए काम मत करो।पद प्रतिष्ठा मान सम्मान सिर्फ ऊपरी सुख मिलता है ह्रदय अशांत रहता है, आध्यात्मिक मार्ग पर चलने से आत्मिक शांति और समृद्धि मिलती है।
जीवन में सार्थकता का अनुभव प्राप्त करने के लिए भगवान का साक्षात्कार होना चाहिए श्री स्वामिनारायण मंदिर रसल चौक में परम पूज्य महंत स्वामी जी महाराज की प्रेरणा से आयोजित श्रीमद्भागवत संत पारायण आध्यात्मिक आयोजन मे पूज्य संत दिव्यमनन्ददास स्वामी जी के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा में कहे।प्रभु से प्रार्थना है कि हम सभी के जीवन में सुख, शांति, सद्भाव एवं आध्यात्मिक चेतना का निरंतर संचार होता रहे।