जबलपुर आध्यात्मिक पर्यटन टूरिस्ट सर्किट बने, फेडरेशन ने पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक से की मुलाकात


जबलपुर। मध्य प्रदेश में आध्यात्मिक और पर्यटन गतिविधियों को नई दिशा देने के लिए फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने प्रदेश में अलग-अलग थीम पर टूरिस्ट सर्किट विकसित करने का सुझाव दिया है। फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने भोपाल में मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉक्टर इलैया राजा टी से मुलाकात कर पर्यटन विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की और मांगपत्र सौंपा।
फेडरेशन अध्यक्ष हिमांशु खरे ने कहा कि मध्य प्रदेश धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन की दृष्टि से समृद्ध है। प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार, आध्यात्मिक एवं ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ठोस योजना बनाने की आवश्यकता है।

उज्जैन से जबलपुर तक बने आध्यात्मिक सर्किट……..

हिमांशु खरे ने सुझाव दिया कि उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, चित्रकूट, जबलपुर और मैहर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़कर आध्यात्मिक पर्यटन सर्किट विकसित किया जाए। इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को एक ही सर्किट में प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की यात्रा का अवसर मिल सकेगा।
इसी तरह खजुराहो, ओरछा, ग्वालियर, मांडू, सांची और भीमबेटका को जोड़कर हेरिटेज पर्यटन सर्किट तथा रातापानी, कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा और पन्ना जैसे राष्ट्रीय उद्यानों को जोड़कर वन्यजीव पर्यटन सर्किट विकसित करने का सुझाव दिया गया।

भेड़ाघाट और मदनमहल के विकास की तैयारी…………..

बैठक में पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक इलैया राजा ने बताया कि प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक, प्राकृतिक और विरासत स्थलों पर पर्यटकों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। पर्यटन को स्थानीय रोजगार और आर्थिक विकास से जोड़ने के लिए विभिन्न पर्यटन स्थलों पर पर्यावरण अनुकूल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि विरासत संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए भी पर्यटन बोर्ड लगातार प्रयास कर रहा है। भेड़ाघाट के समीप प्रस्तावित जियोलॉजिकल पार्क, संग्रहालय, वॉक-वे और पर्यटक सुविधाओं के विकास का काम प्रक्रियाधीन है। इसके अलावा मदनमहल पहाड़ी क्षेत्र के समग्र पर्यटन विकास की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होने की बात कही गई।
इन परियोजनाओं के पूरा होने पर जबलपुर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत पहचान मिलने की उम्मीद है।

गाइड से लेकर होटल कर्मियों तक का हो कौशल विकास………….

फेडरेशन अध्यक्ष हिमांशु खरे ने कहा कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए स्थानीय गाइड, टैक्सी चालक, होम-स्टे संचालक, होटल कर्मचारी और अन्य सेवा प्रदाता ही प्रदेश की पहली छवि बनाते हैं। इसलिए पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए आतिथ्य, व्यवहार और सेवा संबंधी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए। उन्होंने पर्यटन स्थलों के आसपास स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए विशेष बाजार और प्रदर्शन क्षेत्र विकसित करने का सुझाव भी दिया। इससे पर्यटन के साथ स्थानीय रोजगार और उद्यमिता को भी गति मिल सकेगी।
बैठक में सार्वजनिक-निजी भागीदारी, निवेश संवर्धन, विरासत संरक्षण, ग्रामीण पर्यटन और प्रदेश के पर्यटन ब्रांडिंग अभियान को प्रभावी बनाने सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल में फेडरेशन की ओर से अशोक आनंद, प्रवीण आचार्य, डॉ. सुरेंद्र सिंह और राजेश हिरवे उपस्थित रहे।