जबलपुर, नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मेडिकल यूनिवर्सिटी के विभाजन के बाद संपत्ति एवं रिजर्व फंड के प्रस्तावित बंटवारे पर गंभीर आपत्ति जताई है। मंच का आरोप है कि जब कृषि विश्वविद्यालय के विभाजन के समय दोनों विश्वविद्यालयों के बीच समान बंटवारा किया गया था, तब मेडिकल यूनिवर्सिटी के मामले में अलग मापदंड अपनाना न्यायसंगत नहीं है।मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने कहा कि मेडिकल यूनिवर्सिटी के विभाजन में बड़ा हिस्सा उज्जैन को तथा छोटा हिस्सा जबलपुर को दिया जाना जबलपुर के साथ अन्याय है। उनका कहना है कि इससे भविष्य में जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी की आर्थिक स्थिति कमजोर होगी और इसके विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
मंच ने 20 जुलाई को मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि अलग-अलग मेडिकल यूनिवर्सिटी के गठन का उल्लेख तो है, लेकिन कहीं भी मूलधन अथवा रिजर्व फंड के बंटवारे का प्रावधान नहीं किया गया है। ऐसे में वर्तमान मेडिकल यूनिवर्सिटी के लगभग 250 करोड़ रुपये के रिजर्व फंड का विभाजन गैर-कानूनी है।
इस संबंध में नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने मेडिकल यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. पुष्पराज सिंह के माध्यम से डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन एवं प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग, भोपाल को आपत्ति भेजकर निर्णय पर पुनर्विचार करने और जबलपुर के साथ समान न्याय करने की मांग की है।इस अवसर पर डॉ. पी.जी. नाजपांडे, रजत भार्गव, एडवोकेट वेदप्रकाश अधौलिया, यशवंत कोष्ठा, अशोक यादव, श्याम सोलंकी एवं एडवोकेट ब्रजेश साहू उपस्थित रहे।