जबलपुर। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, डॉ. मोहन यादव भारत की सबसे लंबी सिंचाई सुरंग का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद स्लीमनाबाद कैरियर कैनाल प्रोजेक्ट के उद्घाटन के लिए पहुँचे। पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड द्वारा बनाई गई लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह सुरंग राज्य की सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। इस परियोजना से प्रदेश के चार जिलों में लगभग 2.45 लाख हेक्टेयर जमीन के लिए पक्के तौर पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे पानी की निश्चित आपूर्ति के साथ-साथ खेती के विकास में भी मदद मिलेगी।
स्लीमनाबाद कैरियर कैनाल असल में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित की जा रही बरगी डायवर्जन परियोजना का हिस्सा है। नर्मदा नदी पर बने बरगी डैम से 197 किलोमीटर लंबी ट्रांस-वैली नहर के ज़रिए पानी पहुँचाने के लिए तैयार की गई इस परियोजना से पूरे मध्य प्रदेश में लगभग 2 लाख 45 हजार हेक्टेयर ज़मीन पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी, साथ ही जबलपुर और कटनी में घरेलू और कल-कारखानों में उपयोग के लिए हर दिन 284 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति भी संभव होगी। इस पूरी परियोजना की मुख्य कड़ी लगभग 12 किमी लंबी सुरंग है, जिसे पटेल इंजीनियरिंग की अगुवाई वाले कंसोर्टियम ने तैयार किया है। यह सिंचाई के लिए सबसे लंबी सुरंग है।
इस सुरंग को बनाने का काम भारत में सिंचाई के लिए तैयार किए जाने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर के इतिहास में सबसे चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि जमीन के अंदर की परिस्थितियां आसान नहीं थी। इसका रास्ता बहुत अधिक सघना मिट्टी, गाद, जलोढ़, मौसम की मार झेल चुके चूना-पत्थर और डोलोमाइट के अलावा स्लेट, बहुत बड़े आकार के चूना पत्थर और नए मार्बल से होकर गुजरा, जिसकी चट्टानों की मजबूती 180 एमपीए तक थी। इसके अलावा, सुरंग के 2.7 किमी तक के शुरुआती हिस्से में छत से महज 2-3 मीटर ऊपर भूमिगत जल की परत मौजूद थी जिससे पानी रिसने की बहुत अधिक संभावना थी, जबकि पूरी खुदाई के दौरान जल स्तर सुरंग से ऊपर ही बना रहा। यह सुरंग ग्रामीण इलाकों, घनी आबादी वाले शहरी हिस्सों और एक झील के नीचे जैसे अलग-अलग क्षेत्रों से होकर गुजरी।