काव्य धारा के राष्ट्रीय सम्मेलन मेंछह राज्यों के साहित्यकारों का समागम

जबलपुर । राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय संस्था काव्यधारा, हैदराबाद के तत्वावधान में समदड़िया इन में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय साहित्यकार सम्मेलन में छह राज्यों के साहित्यकारों ने भाग लेकर साहित्य, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों पर विचार-विमर्श किया।

सम्मेलन का शुभारंभ वंदना गीत से हुआ। मुख्य अतिथि डॉ. हरिशंकर दुबे ने कहा कि “कवि का मन करुणामय होता है, क्योंकि कविता करुणा से जन्म लेती है।” अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सत्य प्रसन्न ने वर्तमान साहित्य को समाज चेतना का सशक्त माध्यम बताया। विशिष्ट अतिथि डॉ. तनूजा चौधरी, विजय बागरी एवं राजेश पाठक ‘प्रवीण’ ने विश्व शांति में साहित्य की भूमिका पर अपने विचार रखे।

संस्था की अध्यक्ष डॉ. सुनीता ने कहा कि काव्यधारा के आयोजन विभिन्न क्षेत्रों में होने से वहां की संस्कृति और संस्कारों को जानने का अवसर मिलता है। वरिष्ठ साहित्यकार बृजेश शर्मा (झांसी) ने संस्था का परिचय प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर काव्यधारा के काव्य संग्रह ‘खुशबू-ए-सुखन’, ‘मानसी’ तथा हैदराबाद की वरिष्ठ कवयित्री मनोरमा शर्मा की काव्य कृति ‘सूर्य निकलता है रोजाना’ का विमोचन अतिथियों एवं साहित्यकारों हीरालाल यादव (मुंबई), डॉ. अलका शर्मा (भिवानी), असीम आमगाबी और बृजेश त्रिवेदी (हरियाणा) की उपस्थिति में किया गया।

कार्यक्रम का संचालन मिथिलेश बड़गईया, विनीत श्रीवास्तव एवं डॉ. सुनीता ने किया। नगर की पाथेय संस्था की ओर से राजेंद्र मिश्रा, बसंत शर्मा, आचार्य विजय किसलय, विजय नेमा, गणेश प्यासा, संतोष नेमा, डॉ. अनिल कोरी, दीपक तिवारी, डॉ. वीरेंद्र दुबे, सिद्धेश्वरी सराफ एवं आशुतोष तिवारी ने अतिथि साहित्यकारों का सम्मान किया।

दूसरे सत्र में राजकुमार महोबिया के संचालन में काव्य गोष्ठी आयोजित हुई, जिसमें प्रकाश ठाकुर, गणेश प्यासा, दीपक तिवारी, प्रतिमा अखिलेश, विनीता पैगवार, वंदना सोनी, तरुणा खरे सहित अनेक कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।सम्मेलन के दूसरे दिन “संस्कृति, संस्कार और प्रकृति के संग साहित्यकारों के रंग” विषय पर विशेष आयोजन हुआ। साहित्यकारों ने प्राकृतिक स्थलों का भ्रमण करते हुए भारतीय संस्कृति और साहित्य के विविध आयामों पर सार्थक विमर्श किया।