दिल और श्वांस रुकने से हुई थी बाघ की मौत, दूसरी पीएम रिपोर्ट में नए खुलासे : अलग-अलग अंगों के नमूनों की होगी गहन जांच


जबलपुर। जबलपुर में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंतर्गत पनपथा बफर क्षेत्र के खेरवा टोला गांव में 24 मई को एक नर बाघ द्वारा महिला का शिकार किए जाने के बाद उक्त बाघ का शव मिलने के पूरे मामले में वन्यजीव चिकित्सकों के विशेष पैनल द्वारा किए गए दूसरे पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आ गई है। इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बाघ के दाहिने कंधे पर मौत के बाद डॉट लगाया गया था और उसकी जान दिल व सांस रुकने से गई थी।
इस संबंध में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय के मुताबिक जबलपुर के एसडब्ल्यूएफएच सेंटर में मृत बाघ का दोबारा परीक्षण कराया गया था। तीन वन्यजीव चिकित्सकों और दो विशेष आमंत्रित विशेषज्ञों द्वारा किए गए शव परीक्षण के बाद दी गई इस दूसरी रिपोर्ट में बाघ के शरीर की आंतरिक स्थिति को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मृत बाघ की मांसपेशियां पूरी तरह पीली और सूखी पाई गईं। इसके अलावा उसका पाचन तंत्र भी पूरी तरह से खाली था तथा शरीर की त्वचा खुरदरी और बेजान हो चुकी थी। बाघ के दाहिने कंधे पर एक डॉट का निशान भी मिला था, लेकिन उस स्थान से बिल्कुल भी खून नहीं बहा था। इससे यह पूरी तरह साफ हो गया है कि यह डॉट बाघ की मौत हो जाने के बाद लगाया गया था।
श्री सहाय के अनुसार विशेषज्ञों की समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में बताया है कि बाघ की मौत कार्डियक रेस्पिरेटरी फेलियर यानी दिल और सांस रुकने की वजह से हुई थी। डॉक्टरों के अनुसार ऐसा किसी गंभीर बीमारी, शरीर के अंदरूनी रोग, अत्यधिक मानसिक व शारीरिक तनाव या फिर किसी प्रकार की विषाक्तता के कारण होना संभावित है। मौत के इन कारणों की वास्तविक और सटीक वजहों का पता लगाने के लिए बाघ के अलग-अलग आंतरिक अंगों के सैंपल लिए गए हैं। इन सभी नमूनों को आगे की गहन जांच के लिए मानक प्रयोगशालाओं में सुरक्षित भेज दिया गया है, जहां से अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।