बांधवगढ़ में बढ़ रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष, बाघ ने महिला को खाया, रेस्क्यू के बाद बाघ की मौत

जबलपुर| बांधवगढ टाईगर रिजर्व से एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर तस्वीर सामने आई है। जंगल से भटककर गांव पहुंचे एक नर बाघ ने खेरवाटोला गांव में महिला पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया, जबकि परिवार के चार अन्य सदस्य घायल हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई। वहीं रेस्क्यू के दौरान ट्रेंकुलाइज किए गए बाघ की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिसने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार रविवार 24 मई की तड़के पनपथा रेंज के खेरवाटोला गांव में अचानक एक बाघ पहुंच गया। ग्रामीणों के मुताबिक बाघ ने गांव में घुसते ही फूलबाई पाल पर हमला कर दिया। हमले में महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि परिवार के चार अन्य लोग भी घायल हो गए। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोग घरों में दुबक गए।

शव के पास बैठा रहा बाघ, गांव में पसरा रहा डर ……

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमला करने के बाद बाघ करीब छह घंटे तक महिला के शव के पास बैठा रहा। ग्रामीणों में इतना भय था कि कोई भी शव के करीब जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। सूचना मिलने के बाद वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची।
बाघ को काबू में करने के लिए विशेष रेस्क्यू टीम के साथ दो हाथियों को भी बुलाया गया। काफी मशक्कत के बाद बाघ को ट्रेंकुलाइज किया गया, लेकिन कुछ देर बाद उसकी हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।

रेस्क्यू प्रक्रिया पर उठे सवाल ……

बाघ की मौत के बाद अब रेस्क्यू प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रेंकुलाइज के दौरान दवा की ओवरडोज या फिर एंटीडोज देने में देरी बाघ की मौत की वजह हो सकती है। हालांकि वन विभाग फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रहा है।
पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ समीता राजौरा ने बताया कि बाघ का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

जांच के लिए जबलपुर लाया गया शव …..

मृत बाघ के शव को नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस युनीवर्सिटी स्थित एसडबलूएफएच भेजा गया है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा परीक्षण किया जाएगा।
वन विभाग के अनुसार राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के प्रोटोकॉल के तहत बाघ का दोबारा पोस्टमार्टम भी कराया जाएगा। इसके लिए तीन सदस्यीय विशेषज्ञ टीम गठित की गई है, जिसमें डॉ. निधि राजपूत, डॉ. अभय संगेर और डॉ. प्रशांत देशमुख शामिल हैं। फिलहाल शव को डीप फ्रीजर में सुरक्षित रखा गया है।

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा ……

घटना के बाद गांव में भारी आक्रोश देखने को मिला। गुस्साए ग्रामीणों ने वन विभाग के कर्मचारियों पर हमला कर दिया, जिसमें कई वनकर्मी घायल हो गए। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ रही हैं, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल से लगे गांवों में लगातार बाघ और अन्य जंगली जानवरों की आवाजाही बढ़ रही है, जिससे लोगों में डर का माहौल बना हुआ है।

सीएम ने की आर्थिक सहायता की घोषणा …

घटना के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मृतक महिला फूलबाई पाल के परिजनों को 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही घायलों के मुफ्त इलाज के निर्देश भी दिए गए हैं।

बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष बना चिंता का विषय ….

बांधवगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष ने वन विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। जंगलों के सीमित होते दायरे और गांवों तक वन्यजीवों की बढ़ती पहुंच के कारण ऐसे हादसे लगातार सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी रणनीति नहीं बनाई गई तो भविष्य में इस तरह की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।