स्टेशन में बना नैरो गेज भाप इंजन आकर्षण का केंद्र, नई पीढ़ी के लिए गौरवशाली इतिहास बना सैल्फी प्वाइंट


जबलपुर। भारतीय रेलवे की समृद्ध विरासत को संरक्षित रखने हेतु पुराने भाप इंजनों, नैरो गेज कोचों एवं वैगनों को हेरिटेज स्वरूप में सुरक्षित रखने की पहल की गई है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को रेलवे के गौरवशाली इतिहास, पुरानी इंजीनियरिंग तकनीकों एवं कार्य प्रणालियों से परिचित कराना है। इसी क्रम में प्रतिवर्ष 18 अप्रैल को “विश्व धरोहर दिवस” मनाकर विरासत संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाती है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए पश्चिम मध्य रेल, जबलपुर मंडल द्वारा नैरो गेज भाप लोकोमोटिव “718 एफ पंकज” को जबलपुर स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक-1 के बाहर सर्कुलेटिंग एरिया में स्थापित किया गया है। वर्ष 1928 में निर्मित यह ऐतिहासिक इंजन भारतीय रेलवे की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है।
रेलवे द्वारा किए गए आकर्षक सौंदर्यीकरण एवं रंग-रोगन के बाद यह हेरिटेज इंजन यात्रियों एवं शहरवासियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन गया है। प्लेटफार्म क्रमांक-1 के बाहर स्थित यह स्थल अब एक लोकप्रिय सेल्फी प्वाइंट के रूप में विकसित हो चुका है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री एवं युवा वर्ग फोटो खिंचवाते देखे जा सकते हैं। विशेष रूप से शाम के समय आकर्षक प्रकाश व्यवस्था के बीच इसकी भव्यता और अधिक निखरकर सामने आती है।
पूर्व में नैरो गेज एवं मीटर गेज रेलमार्गों पर ट्रेनों की गति अपेक्षाकृत कम होती थी, किन्तु गेज परिवर्तन के माध्यम से इन्हें ब्रॉड गेज में परिवर्तित किए जाने से ट्रेनों की गति एवं संचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आज भारतीय रेलवे की कई ट्रेनें 160 कि.मी./घंटा तक की गति से संचालित हो रही हैं। कोचों एवं वैगनों में आधुनिक तकनीकी सुधारों के कारण यात्री सुरक्षा एवं यात्रा सुविधाओं में भी निरंतर वृद्धि हुई है। आधुनिक वंदे भारत (टी-18) जैसी ट्रेनें भारतीय रेलवे की तकनीकी प्रगति का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।