जबलपुर: भारत एक ऐसा देश है जहाँ बेटियों को घर की लक्ष्मी कहा जाता है, लेकिन दूसरी ओर आज भी कई परिवार बेटियों के जन्म के साथ ही उनके विवाह और दहेज की चिंता में डूब जाते हैं। ऐसे समय में समाज को नई दिशा देने वाला एक प्रेरणादायी उदाहरण जबलपुर जिले की तहसील सिहोरा स्थित रुक्मणी पैलेस में देखने को मिला, जहाँ एक दिवसीय सत्संग समारोह के दौरान दहेज मुक्त एवं सादगीपूर्ण विवाह संपन्न हुआ।
इस पावन अवसर पर वर सुदामा दास एवं वधु मोना (भारती) ने बिना किसी दिखावे, तामझाम, डीजे, बैंड-बाजे, हल्दी एवं अन्य फिजूल रस्मों के अत्यंत सादगी और आध्यात्मिक वातावरण में विवाह किया। विवाह समारोह ने उपस्थित लोगों के मन में गहरा प्रभाव छोड़ा और समाज को यह संदेश दिया कि विवाह कोई व्यापार नहीं, बल्कि पवित्र संस्कार है।
विवाह के पश्चात वर-वधु ने बताया कि उन्हें यह प्रेरणा जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज से मिली है। संत जी अपने सत्संगों में बताते हैं कि जब रिश्ते ऊपर से तय होकर आते हैं और सादगीपूर्ण तरीके से विवाह संभव है, तो फिर दिखावे और कर्ज के बोझ में क्यों डूबा जाए।
सत्संग समारोह के दौरान एक विशेष वीडियो भी चलाया गया, जिसमें संत रामपाल जी महाराज ने धार्मिक प्रमाणों के आधार पर बताया कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश जी के विवाह भी अत्यंत सादगीपूर्ण तरीके से संपन्न हुए थे। उन्होंने यह भी समझाया कि दहेज लेना और देना दोनों ही सामाजिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से गलत हैं, क्योंकि इसका भार मनुष्य को कर्मों के रूप में भविष्य में भी भुगतना पड़ता है।रुक्मणी पैलेस, सिहोरा में आयोजित यह विवाह आज समाज के लिए एक मिसाल बनकर उभरा, जहाँ विवाह को आडंबर नहीं बल्कि संस्कारों का उत्सव बनाया गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इस पहल की खुलकर सराहना की और कहा कि वास्तव में संत रामपाल जी महाराज समाज से दहेज, नशा, पाखंड और अन्य कुरीतियों को समाप्त करने का कार्य कर रहे हैं।अनुयायियों ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में अब तक लाखों दहेज मुक्त विवाह संपन्न हो चुके हैं, जिनसे हजारों परिवार आर्थिक बोझ से मुक्त हुए हैं और बेटियाँ सम्मानपूर्वक सुखी जीवन व्यतीत कर रही हैं।
आज जब समाज दिखावे और खर्चीली शादियों की होड़ में फँसता जा रहा है, तब सिहोरा में संपन्न यह सादगीपूर्ण विवाह एक नई सोच, नई दिशा और संस्कारयुक्त समाज की मजबूत तस्वीर प्रस्तुत करता है।