जबलपुर। प्रांतीय शासकीय प्राध्यापक संघ के प्रदेश प्रतिनिधियों ने आज जबलपुर में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा विभाग और शासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. आनंद शर्मा और संरक्षक प्रो. कैलाश त्यागी ने कहा कि प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। प्रशासन की उदासीनता और आए दिन जारी होने वाले नए आदेशों के कारण पूरा शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है। प्राध्यापक संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले समय में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस अवसर पर संघ के सम्भागीय अध्यक्ष प्रो.अरुण शुक्ल विशेष रूप से उपस्थित रहे।
– पेंशन दावों की जमीनी हकीकत
प्राध्यापक संघ के संरक्षक श्री त्यागी ने सेवानिवृत्ति दावों के भुगतान में हो रही भारी देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के दिन ही उनके सभी वित्तीय लाभ मिलने चाहिए, लेकिन वर्तमान में भुगतान के लिए 6 महीने से लेकर एक साल तक का समय लग रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में उन्होंने भारी भ्रष्टाचार की आशंका भी जताई है। प्रो. त्यागी ने चेतावनी दी कि यदि प्राध्यापकों के काम समय पर पूरे नहीं किए गए, तो संगठन शासन के विरोध सड़कों पर उतरेगा। इसके अलावा अर्जित अवकाश के भुगतान का मुद्दा भी उठा। बताया गया कि इस श्रेणी के भुगतान पांच-पांच साल से लंबित हैं।
– सार्थक ऐप से केवल परेशानियां बढ़ीं
शासकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. आनन्द शर्मा ने शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं को विस्तार से रखा। उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्त हो चुके साथियों के एरियर और जीआईएस का भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है। इसके अलावा महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना जैसे गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाई जा रही है। सार्थक ऐप में आ रही तकनीकी कमियों से भी प्राध्यापकों को लगातार जूझना पड़ रहा है। सबसे बड़ी विसंगति यह है कि महाविद्यालयों में कनिष्ठ कर्मचारियों द्वारा प्राध्यापकों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट लिखी जा रही है, जो पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध है।
-परिवीक्षा अवधि बन रही तनाव का कारण
श्री शर्मा ने 2004 और 2005 में नियुक्त शिक्षकों की समस्या को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि इन शिक्षकों की परिवीक्षा अवधि इतनी लंबी चलने के बाद भी अभी तक समाप्त नहीं की गई है, जिससे उन्हें वित्तीय और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संघ ने मांग की है कि नवनियुक्त सहायक प्राध्यापकों की परिवीक्षा अवधि को बिना किसी देरी के तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए, ताकि वे स्वतंत्र रूप से अपनी शैक्षणिक और प्रशासनिक सेवाएं दे सकें और महाविद्यालयों में पठन-पाठन का कार्य सुचारू रूप से चल सके। पदाधिकारियों ने खेल अधिकारियों के हित में बड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग की कि खेल अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा को 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष किया जाना चाहिए। प्राध्यापकों की इन सभी समस्याओं को प्रशासन द्वारा लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। संघ ने निर्णय लिया है कि जैसे ही महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी, उसी समय शासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए एक बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।