सीमापार रोबोटिक सर्जरी कर बनाया नया कीर्तिमान, मुंबई में बैठे सर्जन ने मस्कट में मरीज़ की ‘रेडिकल नेफरेक्टोमी’ की

मुंबई : विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026 के अवसर पर, जिसका इस वर्ष का संकल्प है —“स्वास्थ्य के लिए एकजुट, विज्ञान के साथ अटूट”, कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी हॉस्पिटल ने वैश्विक चिकित्सा के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया है। विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की एक विस्मयकारी मिसाल पेश करते हुए, डॉ. टी. बी. युवराजा ने मुंबई में बैठकर मस्कट (ओमान) के मेडिकल सिटी अस्पताल में भर्ती एक 55 वर्षीय महिला की सफल रोबोटिक रेडिकल नेफरेक्टोमी (किडनी निकालने की जटिल सर्जरी) संपन्न की। अत्याधुनिक ‘मेडबॉट तौमाई रोबोटिक सर्जरी सिस्टम’ के जरिए अंजाम दी गई यह ऐतिहासिक प्रक्रिया भारत की पहली ‘क्रॉस-बॉर्डर रिमोट रोबोटिक सर्जरी’ मानी जा रही है।

अत्याधुनिक रोबोटिक प्रणालियों और निर्बाध ‘रियल-टाइम’ कनेक्टिविटी की मदद से, इस सर्जरी को असाधारण सटीकता और नियंत्रण के साथ पूरा किया गया। इस सफलता ने दुनिया के सामने ‘क्रॉस-बॉर्डर रिमोट सर्जरी’ की विश्वसनीयता और क्लिनिकल सक्षमता का लोहा मनवाया है। यह क्रांतिकारी उपलब्धि अस्पताल के भविष्य के लिए तैयार और सशक्त इन्फ्रास्ट्रक्चर के कारण ही संभव हो सकी है। कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी हॉस्पिटल, भारत का अग्रणी ‘सेंटर फॉर रोबोटिक सर्जरी’ का केंद्र है और देश की पहली ‘मेडबॉट तौमाई रोबोटिक सर्जरी सिस्टम’ भी यहां है। तीन अत्याधुनिक रोबोटिक प्लेटफॉर्म्स से लैस यह अस्पताल, मल्टी-डिसिप्लिनरी रोबोटिक सर्जरी के क्षेत्र में देश का नंबर-1 निजी चिकित्सा केंद्र बनकर उभरा है।

कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी हॉस्पिटल्स के यूरो-ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी (ग्रुप) डायरेक्टर, डॉ. टी. बी. युवराजा ने—जिनके पास 4200 से भी ज़्यादा रोबोटिक सर्जरी का अनुभव है—इस ऐतिहासिक सफलता पर कहा: “आज हम वैश्विक स्वास्थ्य सेवा के वितरण में एक बुनियादी और क्रांतिकारी बदलाव के साक्षी बन रहे हैं। सीमाओं के पार ‘रियल-टाइम’ में सर्जरी करने की क्षमता का सीधा अर्थ है कि अब बेहतरीन चिकित्सा विशेषज्ञता तक पहुँच भौगोलिक दूरियों की मोहताज नहीं रही। यह मील का पत्थर महज एक सफल ऑपरेशन नहीं है, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि भविष्य की स्वास्थ्य सेवाएँ भौतिक सीमाओं को कितनी तेजी से लांघ रही हैं। जैसे-जैसे तकनीक हमें सात समंदर पार भी सटीक उपचार पहुँचाने में सक्षम बना रही है, भारत इस महा-परिवर्तन का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है। अब हम केवल इलाज के एक डेस्टिनेशन ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर ‘रियल-टाइम’ मेडिकल विशेषज्ञता प्रदान करने वाले एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।”

कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी हॉस्पिटल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीईओ, डॉ. संतोष शेट्टी ने इस गौरवशाली उपलब्धि पर कहा: “यह विकास अस्पताल के तकनीकी नेतृत्व और रिमोट रोबोटिक सर्जरी में हमारी पिछली सफलताओं की अगली कड़ी है, जो मेडिकल इनोवेशन के क्षेत्र में हमारी अग्रणी स्थिति को और भी मजबूत करता है। कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल और डॉ. युवराजा आधुनिक ‘टेलीसर्जरी’ की सीमाओं को लगातार नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं—इस बार भारत की सशक्त क्लिनिकल क्षमताओं का विस्तार मस्कट के एक कैंसर रोगी तक किया गया है।

दुनिया भर की स्वास्थ्य प्रणालियाँ आज विशेषज्ञता और सुलभता के बीच की खाई को पाटने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में यह उपलब्धि एक बड़े बदलाव का शंखनाद है—एक ऐसा भविष्य जहाँ भौगोलिक दूरियाँ बेमानी होंगी, इलाज हर किसी की पहुँच में होगा और भारत वैश्विक स्वास्थ्य सेवा के भविष्य को आकार देने में सबसे अग्रणी भूमिका निभाएगा।”

यह पूरी प्रक्रिया केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के दिशा-निर्देशों सहित सभी विनियामक ढांचों के पूर्ण अनुपालन में संचालित की गई। इसमें सुरक्षा, नैतिकता और क्लिनिकल गवर्नेंस के उच्चतम मानकों का कड़ा पालन सुनिश्चित किया गया। ‘मेडबॉट तौमाई रिमोट रोबोटिक सर्जरी सिस्टम’ के जरिए संपन्न की गई यह ‘रेडिकल नेफरेक्टोमी’, भारत में सीमा-पार क्लिनिकल एप्लिकेशन के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक अध्याय है। नियमों और मानकों का यह सटीक तालमेल अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब रिमोट सर्जरी महज एक तकनीकी चमत्कार नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर अपनाए जाने वाले एक विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवा समाधान के रूप में उभर रही है।

यह उपलब्धि केवल एक तकनीकी चमत्कार ही नहीं है, बल्कि इसके प्रभाव अत्यंत दूरगामी और व्यापक हैं। भारत, जिसे लंबे समय से ‘मेडिकल टूरिज़म’ के वैश्विक केंद्र के रूप में पहचाना जाता रहा है, अब भौगोलिक सीमाओं के पार ‘रियल-टाइम’ चिकित्सा विशेषज्ञता प्रदान करने वाले एक शक्तिशाली देश के रूप में उभर रहा है। अब उन्नत उपचार पाने के लिए मरीजों को सात समंदर पार सफर करने की मजबूरी नहीं होगी; बल्कि भारतीय डॉक्टर दुनिया भर के मरीजों तक डिजिटल माध्यम से खुद पहुँच रहे हैं। इससे न केवल इलाज में होने वाली देरी कम होगी और लॉजिस्टिक चुनौतियाँ घटेंगी, बल्कि विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं तक वैश्विक पहुँच भी और अधिक सुलभ हो सकेगी।

इस क्रांतिकारी बदलाव के केंद्र में ‘मरीज़ प्रथम’ का दृष्टिकोण है। मरीज़ों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा की जटिलताओं के बिना विशेषज्ञ सर्जिकल उपचार प्रदान करना न केवल उनकी सुविधा बढ़ाता है, बल्कि त्वरित उपचार और बेहतर परिणामों की संभावनाओं को भी जन्म देता है। यह ‘सीमा-रहित स्वास्थ्य सेवा’ के उस सशक्त युग की शुरुआत है, जहाँ दुनिया के सर्वश्रेष्ठ डॉक्टर शारीरिक उपस्थिति की अनिवार्यता के बिना, कहीं भी और कभी भी जीवन रक्षक सर्जरी कर सकेंगे।

यह उपलब्धि कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी हॉस्पिटल को अत्याधुनिक और तकनीक-संचालित स्वास्थ्य सेवा के एक ‘वैश्विक कमांड सेंटर’ के रूप में मज़बूती से स्थापित करती है। यह इस बात का जीवंत प्रमाण है कि कैसे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतरीन चिकित्सा विशेषज्ञता का संगम स्वास्थ्य सेवा की सुलभता को एक नई परिभाषा दे सकता है। जैसे-जैसे रिमोट सर्जरी की तकनीक और बेहतर होगी, ऐसी तकनीकें पूरी दुनिया में स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य को बदलने में बड़ी भूमिका निभाएंगी।