आम-खास सबको धन्य कर रही रामभद्र सरकार की कथा

कथा के चतुर्थ दिवस भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन, आशीर्वाद लेने पहुंचे मुख्यमंत्री
जबलपुर। श्रीरामचरित मानस की चौपाई ‘रामजनम जग मंगल हेतू’ विषय पर अवधपुरी गौरीघाट में चल रही पद्मविभूषण, तुलसी पीठाधिश्वर, जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी की रामकथा समरसता के मूलमंत्र को साकार कर रही है। आम-खास का भेद भूल मानो सब ‘राम सबके-सब राम के’ के मूलमंत्र की प्रतिध्वनि हो गए हों। क्या राजा, क्या रंग सब राममय दिखे।

महाराजश्री से मिलने आज मुख्यमंत्री भी आए और आम शहरवासी भी। महाराज श्री ने सबको प्रभु रामभद्र सरकार के प्रेम में डुबो के धन्य कर दिया। कल की कथा विश्राम में प्रभु का प्राकट्य हुआ था। आज भगवान की बाल लीलाओं के आनंद में डूब-उतरा के सभी विभोर थे। महाराजश्री ने मुनिवर वशिष्ट, भगवान सूर्यनारायण, माता कौशल्या, महाराज दशरथ सहित सभी चरित्रों के माध्यम से बताया कि कैसे भगवान का जन्म सबके लिए और जगत के मंगल के कारण से हुआ। महाराजश्री जी ने कथा में सवाल किया कि कौआ को कोई घर में बुलाता है क्या ? लेकिन चूंकि  ‘राम जनम जग मंगल हेतू’ हुआ, इस कारण कौए का भी मंगल हुआ।


*जो जीव के दुखों को नष्ट करे वह मंगल -*

पूज्यश्री ने कहा कि रामजी के अवतार के समय चारों ओर अमंगल ही अमंगल था। रावण ने सबका मंगल छीन लिया था। पृथ्वी हाहाकार कर रही है। तब भगवान ने मंगलमई वाणी में सात पंक्तियों में कहा कि हे मुनियों हे सिद्धों मैं नर के रूप में सबका मंगल करने प्रकट हो रहा हूं। भगवान के चारों कल्पों के अवतारों की चर्चा में संकेत ये है भगवान का वचन था कि अंडज पिंडज सबका मंगल मैं करूंगा। मंगल का अर्थ बताते हुए महाराजश्री ने कहा कि मंगति सर्पती दुक्खम नाशयति यत्तन मंगलम। अर्थात जो आते ही जीवों के दुखों को नष्ट कर दे, उसे मंगल कहते हैं। उन्होंने कहा कि नख से शिख तक भगवान का विगृह अपने आप में मंगल है। श्री हरि मंगल के आयतन यानी घर है। इसीलिए उनके लिए गाया गया है कि मंगल भवन अमंगल हारी। उन्हानें कहा कि माया, तीनों गुण और दोनों इंद्रिया जहां हैं, वहां मंगल नहीं हो सकता है। श्रीरामजी माया, गुणों और इंद्रियों से परे हैं, इसलिए वे मंगल के स्वरूप हैं।

*तुलसीदास जी का अनूठा पांडित्य -*

गोस्वामी तुलसी दास जी के अनूठे पाडित्य की व्याख्या उन्होंने मानस में कोशल्या शब्द के उपयोग का अर्थ समझाते हुए कही। उन्होंने बताया कि कौशल्या का अर्थ सिर्फ रामजी की माता से नहीं है। पूज्यश्री ने कई उदाहरणों के माध्यम से बताया कि तुलसीदास जी ने कोशल्या का अर्थ बहुत ही व्यापक रूप में श्रीरामचरित मानस में किया है।

उन्होंने रामजनम की स्तुति भए प्रकट कृपाला दीनदयाला को सोहर की धुन में गा कर सबका मन मोह लिया और सभी को आनंद में मग्न कर दिया। महाराजश्री ने एक प्रसंग का जिक्र करते हुए बताया कि गुरुवर वशिष्ट का सबसे ज्यादा अमंगल हुआ था। लेकिन, भगवान श्रीराम ने वशिष्ट जी का सबसे बड़ा मंगल किया। गुरुवर की गोद में आकर उनका महामंगल कर दिया। क्योंकि उन्हें कभी पुत्र को गोद में लेने का सुख नहीं लिया था। यही नहीं, उनके आश्रम में भगवार शिष्य बन कर रहे और उनका मंगल किया।

*बधइयां बाजे आंगने में -*

चूंकि चतुर्थ दिवस की कथा में प्रभु श्रीराम की बाललीला का वर्णन था। अत: महाराज जी ने आज की कथा में अवधी, भोजपुरी सहित क्षेत्रीय बोली में बाललीला के कई भजन गा कर राघवेन्द्र सरकार के बाल रूप को सजीव किया। आज अवधपुर राघव जन्मे बधइयां बाजे आंगने में भजन सुना कर महाराजश्री ने सभी को भावविभोर कर दिय। आज की कथा में महाराजश्री कई बार भावुक हुए। उनकी वाणी से भजन सुन कर श्रोताओं को ऐसा लगा मानो अयोध्या में रामजनम पर बज रहीं बधाइयों में वे स्वयं शामिल हैं। महाराजश्री ने कहा कि भगवान ने बाल्यकाल से ही लीला कर सबका अमंगल दूर किया। सूर्यदेव के जीवन का सबसे बड़ा अमंगल राहू का ग्रसना था। लेकिन भगवान ने जन्म लेकर सूर्य नारायण का अमंगल नष्ट किया। ब्रम्हाजी ने सूर्यदेव को एक माह के लिए अस्त नहीं होने का वरदान दिया। इस तरह सूर्यदेव एक माह के लिए स्थिर हो गए।

*हमारा राष्ट्रगान रामगान भी है -*

महाराजश्री ने कहा कि हमारा राष्ट्रगान, राष्ट्रगान नहीं , राम गान है। वास्तव में पंचम जार्ज की स्तुति में रविन्द्र नाथ टैगोर ने जन-गण मन अधिनायक जय हो लिखा था। मेरा विचार है कि यह मेरे प्रभु के गुणगान की जय है। जन-गण अधिनायक जय हो। राम जी ही संपूर्ण जन-गण के अधिनायक और भारत के भाग्य के विधाता हैं। रामजी पंजाब सिंध गुजरात मराठा सब जगह के आराध्य हैं। भगवान की जय की गाथा ही सब गा रहे हैं।  गाहे तब जय गाथा पंक्ति यही कह रही है। आखिरी में जय है जय है सात बार जया है। ये भगवान श्रीराम जी की की ही जयजयकार है। मानस के सातों कांडों, सातों द्वीपों, सात समंदर पर आपकी जय हो रही है।

हे प्रभ श्रीराम आप हमारे काम क्रोध लोभ पर जय यानी विजय प्राप्त करा दें। भगवान ने विश्वामित्र आश्रम, दंडकारण्य और लंगा में जय प्राप्त की। यही आपकी जय की गाथा है कि आज पूरा विश्व श्रीराम जय राम जय जय राम कह रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक रामजी की कृपा रहेगी, भारत का बाल भी बांका नहीं होगा। जन गण मंगल दायक जय है, तो वे जन-जन का मंगल करने वाले हैं। मंगल भवन अमंगल हारी।

*मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लिया आशीर्वाद -*

महाराजश्री का  का आशीर्वाद लेने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का आगमन हुआ। उन्होंने साकेत वाटिका गौरीघाट में महाराज जी से भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को कथा में शामिल होना था परन्तु कार्यक्रम में परिवर्तन के कारण मुख्यमंत्री महाराज जी से भेंट करने उनके विश्राम स्थल पर पहुंचे। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के साथ लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह,  सांसद श्री आशीष दुबे, जिला अध्यक्ष श्री रत्नेश सोनकर, ग्रामीण जिला अध्यक्ष श्री राजकुमार पटेल, महापौर श्री जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक श्री अजय विश्नोई, श्री अशोक रोहाणी, श्री सुशील तिवारी इंदु, श्री नीरज सिंह, श्री अभिलाष पांडे, श्री संतोष बरकड़े ने महाराज श्री का आशीर्वाद लिया।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के साकेत वाटिका आगमन पर समरसता सेवा संगठन द्वारा उनकी आगवनी एवं भव्य स्वागत किया गया। संगठन के सदस्यों ने समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन एवं सचिव उज्ज्वल पचौरी , आयोजन समिति अध्यक्ष  डॉ जितेंद्र जामदार, सचिव अखिल मिश्र, पं रोहित दुबे, स्वागत समिति अध्यक्ष गुलशन मखीजा,की उपस्थिति में स्मृति चिन्ह देकर अभिनन्दन किया।

*प्रतिबिंब करता है बिंब का अनुशरण -*

गिरदावली प्रस्तुत करने के पूर्व तुलसी पीठ के युवराज आचार्य रामचंद्रदास जी ने कहा कि वर्तमान कालखंड में भारतीय वैदिक वांग्मय पर और साथ ही तुलसी साहित्य पर पूज्य गुरुदेव का जितना अधिकार है, उतना किसी को नहीं है। पांच साल में जब बच्चे ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार रटते हैं, उस उम्र में महाराजश्री को गीता कंठस्थ हो गए थे। आज महाराजश्री ने एक भेद खोलले हुए कहा कि अशोक वाटिका में माया की सीताजी थीं। और वहां उन्होनें हनुमानजी को जो आशीर्वाद दिया वो सीताजी का माना नहीं जाएगा। वो प्रतिबिंब का आशीर्वाद था। तो महाराजश्री ने कहा कि प्रतिबिंब किसका अनुकरण करता है बिंब का। तो वह प्रतिबिंब भी मूल सीता ही का अनुसरण कर रही थी, अत: आशीर्वाद सीताजी का ही था। महाराजश्री आध्यात्म परंपरा को सहेजने का काम कर रहे हैं। भारतीय संस्कृति तभी बचेगी जब संस्कृत बचेगी। शासन व्यवस्था को भी संस्कृत की रक्षा करने का दायित्व लेना पड़ेगा।

*राष्ट्र को देवता मानिए -*

महाराजश्री ने कहा कि हमारे यहां पितृ देवताभ्याम नम: मातृ देवताभ्याम नम: आचार्य देवताभ्याम नम: कहते हहैं। अब राष्ट्र देवताभ्याम नम: कहने की भी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिसने भी भारत में जन्म लिया है, उसकी भाषा संस्कृत भाषा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संस्कृति का उदय अंग्रेजी या किसी अन्य भाषा से नहीं आ सकती। तुलसी पीठ का ये संकल्प है कि हम ऐसा गुरुकुल बनाएं, जो भारतीय सनातन वैदिक संस्कृति का प्रचार करे। इसलिए इस गुरुकुलम को हम स्थापित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी 14 जनवरी को इसका उद्घाटन होकर ही रहूंगा। उन्होंने सभी संस्कारधानी वासियों से अनुरोध किया कि एक माला यहां से पूरी हो, जिसमें हम इस गुरुकुलम को बहुत सुंदर प्रकार से चला सकें। इस गुरुकुलम में हम ऑनलाइन भी पढ़ाएंगे और तीन सौ विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे, रुकाएंगे खिलाएंगे। इसमें केवल बालक नहीं, बल्कि वृद्ध और बालिकाएं भी पढ़ेंगी।

*नाम-रूप व्युत्पत्ति की भ्रांति दूर करती है कथा -*

महाराजश्री द्वारा गिरधावली प्रस्तुत करने के बाद साकेतधाम के अधिष्ठाता स्वामी गिरीषानंद जी ने कहा कि श्रीराम शब्द की व्युत्पत्ति, कथा की व्युत्पत्ति सहित जिन विषयों पर लोगों में भा्रंतियां होती हैं, उन्हें महाराजश्री सहज ही समाधान कर देते हैं। गिरीषानंद जी ने कहा कि आज कल कथा का रूप बिगड़ गया है, यदि सचमुझ रामकथा सुननी है तो महाराजश्री से सुनिए। तुलसीदास जी ने जो गूढ़ रहस्य मानस में समेटे हैं, वे महाराजश्री जैसे प्रवक्ता ही उद्घाटित करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई मक्खन दुह के दे दे तो दही जमाने का उपक्रम कौन करेगा। ऐसे ही तुलसी दास जी ने सबका रस और मक्खन रामचरित मानस के रूप में दे दिया है। मानस को पढ़ लेने, सुन लेने से सारे वेद शास्त्रों का सार सहज ही समझ में आ जाता है।

*जहां गुरु विराजमान वहां तीर्थ -*

राम अवेयरनेस मूवमेंट के डॉ अखिलेश गुमाश्ता ने महारजाश्री का सवागत करते हुए कहा कि जहां हमारे गुरुदेव विराजमान हो जाते हैं, वो स्थान तीर्थ हो जाता है। कर्मक्षेत्र में भी जो तुलसी पीठ कर रही है, वो अनुकरणीय है। चित्रकूट में जो गुरुकुलम स्थापित हो रहा है, वो संसार का अनुकरणीय और अकथनीय उदाहरण है। जब से हम पैदा हुए हैं तब से राष्ट्र ऋण, पितृ ऋण, ऋषि ऋण हम पर सदा रहता है। श्री गुमाश्ता ने कहा कि हम सभी को उक्त तीनों ऋणों से उबारने का अवसर महाराजश्री ने दिया है। हमारा कर्तव्य है कि हम इन ऋणों से मुक्त हों। उन्होंने 11 लाख रु. की राशि गुरुकुलम के लिए समर्पित की।

*इन्होंने किया पादुका पूजन -*

कथा के पूर्व रामानंदा पीठ की चरण पादुकाओं का पूजन-अर्चन
सांसद श्री आशीष दुबे,  उद्योगपती श्री कैलाश गुप्ता, भाजपा प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री अखिलेश जैन, श्री शरद भाई पालन , डॉ अखिलेश गुमास्ता, संपादक श्री उज्ज्वल शुक्ला, श्री भूपेन्द्र पाराशर, श्री संतोष ओसवाल ने समर्चन कर किया।

पूजन का मंगल विधान तुलसीपीठ के आचार्य युवराज रामचंद्रदासजी ने सुखाचार्य द्वाराचार्य राघवदेवाचार्य जी की उपस्थिति में संपन्न कराया। पादुकापूजन करने के उपरांत सभी ने व्यास पीठ का पूजन कर महाराजश्री का स्वागत वंदन-अर्चन किया।

जस्टिस एच पी सिंह , श्री अशोक मनोध्या,श्री राजीव शर्मा , प्रदीप चौकसे , पंडित रमेश दुबे , मनीष खरे, मुन्ना पाण्डेय , अशोक पांडे ने भी महाराजश्री का माल्यार्पण कर वंदन किया।

*मंचासीन पूज्य संत परमहंस स्वामी गिरीशानंद जी महाराज , स्वामी मुकुंददास जी महाराज, स्वामी सुरेशानंद जी महाराज का स्वागत डॉ जितेन्द्र जामदार , संदीप जैन  ने किया।*

*आज की कथा के विश्राम पर माननीय न्यायमूर्ति श्री विशाल मिश्रा, विधायक श्री अशोक रोहाणी महाधिवक्ता श्री प्रशांत सिंह, पूर्व सांसद श्री आलोक संजर , जस्टिस एच पी सिंह , मेवालाल छिरोलिया ने आरती कर आशीर्वाद प्राप्त किया।*

*कथा उपरांत भक्ति गीतों की प्रस्तुति -* श्रीराम कथा के बाद विख्यात देवी गुण गायक श्री मनीष अग्रवाल मोनी (अंगना पधारो ग्रुप) एवं साथी कलाकारों द्वारा भजनो की प्रस्तुति देते हुए उपस्थित भक्तो का मन मोह लिया। प्रतिदिन भजनो की प्रस्तुति गायक कलाकारों द्वारा कथा उपरांत दी जाती है।