जबलपुर। वर्तमान एलपीजी गैस सिलेंडरों की कमी का मुख्य कारण केंद्र और राज्य सरकारों तथा तेल कंपनियों की दूरदर्शिता की कमी है। उज्ज्वला योजना के माध्यम से गैस कनेक्शन घर-घर तक पहुंचाए गए लेकिन उसी अनुपात में आवश्यक व्यवस्था विकसित नहीं की गई।
आज एक गैस डीलर पर लगभग 5 से 6 हजार ग्राहकों का भार है। नई डीलरशिप से जुड़े मामले अदालतों में लंबित हैं। इन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर जल्द से जल्द नए डीलरों की नियुक्ति करना समय की आवश्यकता है।
ग्राहक दक्षता कल्याण फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन सोलंके ने यह आरोप लगाते हुए कहा कि देश में कम से कम 6-7 महीने के गैस भंडारण की क्षमता और बॉटलिंग प्लांट्स की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
दुर्भाग्य से इस दिशा में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। सबसे गंभीर विषय घरेलू गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी है। घरेलू गैस सिलेंडर का बड़े पैमाने पर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और वाहनों में उपयोग किया जा रहा है।
अत्यावश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अंतर्गत होने वाली कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। यह अपराध अभी जमानती होने के कारण, आपूर्ति विभाग के अधिकारी पूरे दिन मेहनत कर मामला दर्ज करते हैं और आरोपी कुछ ही घंटों में बाहर आ जाता है।
जब तक इस अपराध को गैर-जमानती नहीं बनाया जाएगा, तब तक इस पर प्रभावी रोक नहीं लग पाएगी। युद्ध या आपातकाल जैसी परिस्थितियों में ऐसे अवसरवादी लोग स्थिति का फायदा उठाकर गैस सिलेंडर को दोगुने दामों पर बेचते हैं और इसका सबसे अधिक नुकसान आम उपभोक्ता को होता है।
इसलिए उपभोक्ताओं से भी अनुरोध है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और अतिरिक्त शुल्क न दें। ग्राहक दक्षता कल्याण फाउंडेशन पिछले तीन वर्षों से इस विषय पर लगातार संघर्ष कर रहा है। हमने पी.आई.एल. क्र. 33/2025 दायर की है।
केंद्र सरकार, महाराष्ट्र राज्य सरकार और तेल कंपनियों को नोटिस दिए जाने के बावजूद अभी तक कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है। इसके अलावा हमने केंद्र सरकार को कई बार पत्र लिखे लेकिन अभी तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
संगठन ने मांग है कि केंद्र सरकार इस गंभीर विषय को हल्के में न ले और देश के प्रत्येक उपभोक्ता के हित में तत्काल कठोर कदम उठाए। गैस सिलेंडरों पर बारकोड / क्यूआर कोड और आरएफआईडी टैग प्रणाली जल्द लागू की जाए, साथ ही सभी उपभोक्ताओं का ई-केवाईसी किया जाए ताकि घरेलू गैस सिलेंडर केवल घरेलू उपयोग के लिए ही उपलब्ध हो और उसका दुरुपयोग न हो। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को केवल व्यावसायिक गैस सिलेंडर ही उपयोग करने के लिए बाध्य किया जाए।