जबलपुर । इबादत, सब्र और आत्ममंथन का पाक महीना रमजान जैसे ही शुरू हुआ, नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय कारागार के माहौल में भी रूहानी रंग घुल गया। जेल में निरुद्ध 156 बंदियों ने इस वर्ष रोजा रखने का संकल्प लिया है। बंद सलाखों के पीछे भी खुदा की इबादत, नमाज़ और रोजे की पाबंदी के साथ आस्था की मिसाल देखने को मिल रही है।
केंद्रीय जेल के जेलर मदन कमलेश ने बताया कि रोजा रखने वाले बंदियों के लिए सुबह तड़के सेहरी की विशेष व्यवस्था की जाती है। फज्र की नमाज़ के बाद बंदी अपने-अपने बैरकों में लौट जाते हैं और दिनभर सब्र के साथ रोजा निभाते हैं। शाम होते ही निर्धारित समय पर अफ्तारी कराई जाती है, जिसमें पौष्टिक और संतुलित भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रशासन की ओर से रोजेदार बंदियों के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। चिकित्सकीय टीम निगरानी में है, ताकि किसी भी बंदी को कमजोरी या अन्य समस्या होने पर तुरंत सहायता मिल सके। जेल प्रबंधन ने रोजेदारों की सूची तैयार कर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं।
पिछले वर्ष से अधिक बंदी रोजे में …
जेल प्रशासन के अनुसार, गत वर्ष की तुलना में इस बार अधिक बंदियों ने रोजा रखा है। यह न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि आत्मसंयम और सुधार की भावना को भी दर्शाता है। रमजान के दौरान बंदी नमाज़, कुरआन पाठ और दुआओं में समय व्यतीत कर रहे हैं। जेल परिसर में शांति और आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है।
आस्था का संगम …
गौरतलब है कि आने वाले 19 मार्च से चैत्र नवरात्र प्रारंभ हो रहे हैं। जेल प्रशासन ने बताया कि जिस प्रकार रमजान में रोजेदारों की व्यवस्थाएं की जा रही हैं, उसी प्रकार नवरात्र के दौरान व्रत रखने वाले बंदियों के लिए भी विशेष प्रबंध किए जाएंगे। मां दुर्गा की उपासना करने वाले बंदियों के लिए पूजा-पाठ और व्रत सामग्री की तैयारी की जा रही है।
सद्भाव और अनुशासन की मिसाल …
केंद्रीय कारागार में रमजान और नवरात्र जैसे पर्वों के अवसर पर विभिन्न धर्मों के बंदियों के बीच आपसी सम्मान और सौहार्द का वातावरण देखने को मिलता है। जेल प्रशासन का कहना है कि धार्मिक आस्था के माध्यम से बंदियों में सकारात्मक सोच और आत्मसुधार की भावना प्रबल होती है।