जबलपुर । हाल ही में अमेरिका और भारत के बीच हुए व्यापार करार को किसान विरोधी बताते हुए भारत कृषक समाज ने इसका तीव्र विरोध जताया है। संगठन ने इस संबंध में कलेक्टर के माध्यम से तथा ई-मेल और स्पीड पोस्ट से महामहिम राष्ट्रपति महोदया को ज्ञापन भेजकर करार वापस लेने की मांग की है।
संगठन का कहना है कि यह समझौता एकतरफा है और इससे भारतीय अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से किसानों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले उत्पादों पर 18 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जाएगा, जो पहले की तुलना में कई गुना अधिक है, जबकि अमेरिका से भारत आने वाले उत्पादों पर शून्य प्रतिशत टैरिफ प्रस्तावित है। इससे घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और किसानों को नुकसान होगा।
ज्ञापन में कहा गया है कि सोयाबीन का आयात भले न हो, लेकिन सोया तेल के आयात की अनुमति और मक्का के स्थान पर मक्के से बने केटल-फीड (डीडीजी) के आयात से किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। संगठन का दावा है कि अमेरिकी कृषि क्षेत्र को भारी सब्सिडी मिलती है और बड़े जोत आकार के कारण वहां के किसान अधिक प्रतिस्पर्धी हैं, जबकि भारत में छोटी जोत और सीमित सहायता के कारण किसान ऐसी प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकते हैं।
भारत कृषक समाज के महाकौशल क्षेत्र अध्यक्ष इंजीनियर के.के. अग्रवाल, संभागीय सचिव रूपेंद्र पटेल तथा जिला अध्यक्ष जे.आर. गायकवाड़ ने बताया कि संगठन ने करार के संभावित प्रभावों को लेकर राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।