जबलपुर| जिस महिला नेत्र चिकित्सक ने अपनी पूरी जिंदगी हजारों लोगों की आंखों को रौशनी देने में लगा दी, आज वही रौशनी की मसीहा खुद अंधेरे में धकेल दी गई है। राइट टाउन निवासी 81 वर्षीय वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमलता श्रीवास्तव इस वक्त मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रही हैं, और वहीं से वह अपने साथ हुई कथित धोखाधड़ी, फ्राड और लूट के खिलाफ इंसाफ की गुहार लगा रही हैं।
डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की करोड़ों रुपए मूल्य की वह जमीन, जिसे समाज और आमजन के हित में समर्पित किया जाना था, कथित तौर पर उनकी बीमारी, धुंधली नजर और बेहोशी का फायदा उठाकर हड़प ली गई। इस पूरे मामले ने न सिर्फ चिकित्सा जगत, बल्कि पुलिस प्रशासन, रजिस्ट्री कार्यालय और सरकारी तंत्र की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आईसीयू से जारी वीडियो बयान में चौंकाने वाले खुलासे …
अस्पताल में भर्ती डॉ. हेमलता श्रीवास्तव का एक वीडियो बयान सामने आया है, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। वीडियो में वह स्पष्ट शब्दों में कहती नजर आ रही हैं कि उनके साथ प्रॉपर्टी फ्राड हुआ है।
डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार, मैं गंभीर रूप से बीमार थी, मुझे अस्पताल लाया गया था। मैं बेहोशी की हालत में थी, चश्मा भी नहीं लगा था, सबकुछ धुंधला दिख रहा था। उसी दौरान डॉक्टर सुमित जैन और डॉक्टर प्राची जैन ने मुझसे कहा कि ये अस्पताल के कागज हैं, इन पर दस्तखत कर दीजिए। मैंने उन पर भरोसा किया और साइन कर दिए। मुझे कोई कागज पढ़कर नहीं सुनाया गया। अब मुझे समझ आ रहा है कि मुझे बेवकूफ बनाकर राईट टाउन डॉ मुखर्जी के सामने स्थित मेरी करोड़ों की प्रॉपर्टी ले ली गई है। न मैंने कोई दान पत्र किया है और न ही मैं ऐसा करना चाहती हूं। इस तरह एक डॉक्टर दंपत्ति ने 10 हजार स्कवायर फीट की जमीन की रजिस्ट्री करा ली और शेष जमीन की रजिस्ट्री गायत्री मंदिर के नाम पर करा ली| इस प्रापर्टी की कीमत लगभग 50 करोड़ रुपए बताई गई है|
यह बयान न सिर्फ कथित धोखाधड़ी की कहानी बयां करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह एक असहाय बुजुर्ग महिला की स्थिति का फायदा उठाया गया।
सगी बहन और बहनोई पर भी गंभीर आरोप…
मामले को और भी संवेदनशील बनाते हुए डॉ. हेमलता श्रीवास्तव ने कहा है कि मदनमहल थाने में पहले ही शिकायत दी गई थी पुलिस को भी बयान दिए गए थे लेकिन पुलिस ने बयान दबा लिए| पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे है| डॉ.हेमलता श्रीवास्तव ने अपने बयान में अपनी सगी बहन शांति तिवारी और बहनोई कृष्ण राजेंद्र तिवारी पर भी बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि उनकी बीमारी और चलने-फिरने में असमर्थता का फायदा उठाकर उन्हें अपने ही घर में बाहरी दुनिया से काट दिया गया। न उन्हें पड़ोसियों से मिलने दिया जा रहा है और न ही उन कर्मचारियों से, जो वर्षों से उनके साथ ईमानदारी से काम करते रहे। यह स्थिति सीधे तौर पर मानवाधिकारों के उल्लंघन की ओर इशारा करती है।
फिर भी प्रशासन मौन……
सबसे बड़ा और चिंताजनक सवाल यह है कि 14 जनवरी 2026 को कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत और चेतावनी दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
शिकायत के 16 दिन बीत जाने के बाद भी न तो कोई प्राथमिकी दर्ज हुई और न ही किसी तरह की जांच शुरू की गई। यह प्रशासनिक चुप्पी न सिर्फ संदेह पैदा करती है, बल्कि सिस्टम की निष्पक्षता पर भी सवालिया निशान लगाती है। अब जब मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, तब जाकर सामाजिक संगठनों, नागरिकों और चिकित्सा समुदाय ने डॉ. हेमलता की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर आवाज बुलंद करनी शुरू की है।
चिकित्सा संगठनों की मांग……..
शहर के चिकित्सक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की बेशकीमती जमीन, जो मूल रूप से समाज के हित के लिए थी, उसे सरकार अपने नियंत्रण में ले। इससे न सिर्फ जमीन को कथित बंदरबांट से बचाया जा सकेगा, बल्कि भविष्य में किसी भी तरह के दुरुपयोग पर भी रोक लगेगी।
साथ ही, पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराए जाने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और डॉ. हेमलता श्रीवास्तव को शीघ्र न्याय दिलाने की मांग भी की जा रही है।
सवाल सिर्फ एक बुजुर्ग महिला का नहीं
यह मामला केवल एक बुजुर्ग डॉक्टर के साथ हुई कथित धोखाधड़ी का नहीं है, बल्कि यह उस सिस्टम की परीक्षा है, जो कमजोर, बीमार और असहाय लोगों की रक्षा के लिए बना है। आज अगर रौशनी बांटने वाली एक महिला डॉक्टर खुद अंधेरे में इंसाफ मांग रही है, तो यह पूरे समाज और शासन-प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी है।