10 फीसदी विद्युत दर वृद्धि प्रस्ताव ऑटोमेटिक विचारार्थ स्वीकृत, जनसंगठनों ने जताया आक्रोश


जबलपुर । बिजली रेट में 10.19 प्रतिशत की भारी भरकम वृद्धि करने का प्रस्ताव 9 दिसम्बर को इस आधार पर विचारार्थ स्वीकृत किया गया कि विद्युत नियामक आयोग विनियम 2021 के रेग्युलेशन 7.6 में यह बताया गया है कि आयोग के समक्ष रखे गये प्रस्ताव को ऑटोमेटिक स्वीकृत हुआ यह माना जायेगा। अब इस प्रस्ताव पर जनसुनवाई होगी। जनसंगठनों ने उपभोक्ताओं को अवसर नहीं देने और अंधेरे में रखने पर बिजली कंपनियों के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया है|

जस्टिस द्विवेदी ने याचिका खारिज की थी……………

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने बताया कि पूर्व में उनकी शिकायत के आधार पर आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस एस.सी. द्विवेदी ने बिजली के रेट बढ़ाने का प्रस्ताव इस कारण विचारार्थ स्वीकृत नहीं किया क्योंकि उपभोक्ताओं को समुचित अवसर नहीं मिला था।

उपभोक्ताओं को अंधेरे में रखा………….

वर्तमान में बिजली कम्पनियों ने 29 नवम्बर को बिजली के रेट बढ़ाने का प्रस्ताव आयोग के समक्षा रखा, फिर भी आगामी 10 दिनों तक उसे सार्वजनिक नहीं किया, जबकि रेग्युलेशन 7.6 में प्रस्ताव को सार्वजनिक करने की मनाई नहीं है। इस तरह जानबूझकर उपभोक्ताओं को अंधेरे में रखा गया।

क्या प्रदेश सरकार सहमत है?…………….

जनसंगठनों के रजत भार्गव, टी. के. रायघटक, डी. के. सिंह, एड. वेदप्रकाश अधौलिया, सुभाष चंद्रा, सुशीला कनौजिया, गीता पांडे, संतोष श्रीवास्तव, डी. आर. लखेरा, पी.एस. राजपूत आदियों ने बताया कि जनसंगठनों ने 13 दिसम्बर को प्रदर्शन कर बिजली रेट बढ़ाने का प्रस्ताव सार्वजनिक नहीं कर चुपचाप से विचारार्थ स्वीकार करने के खिलाफ जबलपुर जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य सरकार को शिकायत भेजी थी, किंतु अभी तक सरकार ने अपनी चुप्पी तोड़ी नहीं है।