जबलपुर । म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की दर वृद्धि के प्रस्ताव के विरुद्ध किसानों की ओर से किसानों के गैर राजनैतिक, वर्ग विहीन, राष्ट्रीय संगठन भारत कृषक समाज द्वारा म.प्र. विद्युत् नियामक आयोग भोपाल को आपत्ति प्रस्तुति की गई।
भारत कृषक समाज महकौशल प्रांत के अध्यक्ष इंजी. केके अग्रवाल द्वारा किसानों की ओर से प्रस्तुत आपत्ति मे कहा गया है की जब तक किसान व ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों को उनकी आवश्यकतानुसार, गुणवत्ता की पर्याप्त बिजली प्रदाय सुनिश्चित नहीं किया जाता तब तक विद्युत कम्पनी का दर बृद्धि का प्रस्ताव न्याय संगत नही है। शहर व ग्रामीण क्षेत्र के विद्युत् प्रदाय में भेदभाव विद्युत् चार्टर का स्पष्ट उल्लघंन है। क्या ग्रामीणों को शहरीय लोगों जैसा जीवन जीने का अधिकार नही है। क्या उन्हे दोयम दर्जे का नागरिक समझा जाता है। यह अंतर, भेदभाव समझ के परे है।
श्री अग्रवाल ने आपत्ति में कहा है की ग्रामीण क्षेत्र में बिजली की लाइनों, खम्भो, कट आउटों, ट्रांसफार्मरो की हालत बद से बदतर हो गई हैँ। अधिकांश ट्रांसफार्मर ओवर लोडेड हैं जो रोज बिगड़ जाते है, महीनों सुधार नहीं होता। वोल्टेज की समस्या हमेशा बनी रहती है, जिससे मोटरे जल जाती हैँ, कहने को तो 10 घंटे बिजली देने का नियम है, पर मिलती केवल 6,7 घंटे ही है। इसके स्पष्ट प्रमाण है, जिसे अनदेखा किया जाता है। बिना जाँच के कृषि पम्पों के हार्स पावर बढ़ा बढ़ा कर बिजली बिल की अवैधानिक वसूली करने व सरकार से सब्सिडी हड़प करने खेल बदस्तूर जारी है।
आपत्ति मे कहा गया है की कम्पनी की लापरवाही से हो रहे लाइन लॉस, अनाप सनाप अनियंत्रित खर्च व व्याप्त अनियमित्तओ तथा भ्रष्टाचार से उत्पन्न कम्पनी की हालातो का ठीकरा उपभोक्ताओ पर फोड़ा जाना, व दर बृद्धि का भार थोपा जाना कतई न्यायोचित नहीं है। अतः विद्युत कम्पनी के बिद्युत दर बढ़ोतरी का प्रस्ताव सिरे से ख़ारिज किये जाने योग्य है।