किसानों ने एसडीएम को खून से लिखा पत्र सौंपा, 5 माह के बाद भी नहीं मिला मूंग उड़द का भुगतान


जबलपुर । किसान, जिसे अन्नदाता कहा जाता है, एक बार फिर गंभीर संकट से जूझ रहा है। मामला ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द फसल के उपार्जन भुगतान से जुड़ा है। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा एमएसपी दर पर मूंग-उड़द का उपार्जन सेवा सहकारी समिति बसेड़ी के माध्यम से एमएलटी वेयरहाउस मजीठा में किया गया था, लेकिन पांच माह बीत जाने के बाद भी किसानों को उनकी उपज का भुगतान नहीं मिल पाया है। इसके विरोध में किसानों ने अधिकारियों को खून से लिखा पत्र भी सौंपा, जो उनकी पीड़ा और हताशा को स्वयं बयां कर रहा है।
भुगतान न मिलने से आहत किसानों ने एसडीएम शहपुरा को ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा व्यक्त की। किसानों का कहना है कि लगातार भुगतान में देरी के कारण उनकी आर्थिक स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। अधिकारी कार्यालयों के चक्कर लगाते-लगाते वे मानसिक रूप से भी परेशान हो चुके हैं।
किसानों ने स्पष्ट कहा है कि यदि प्रशासन भुगतान करने में असमर्थ है तो उन्हें उनकी उपज ही वापस कर दी जाए। इसी मांग को लेकर किसानों ने 28 जनवरी को मजीठा वेयरहाउस पहुंचने का निर्णय लिया है। उन्हें उम्मीद है कि वहां प्रशासन से उन्हें सहयोग और न्याय मिलेगा।

क्या है पूरा मामला………..

ग्रीष्मकालीन फसल मूंग-उड़द की खरीदी सहकारी समिति बसेड़ी द्वारा एमएलटी वेयरहाउस मजीठा में की गई थी। बाद में वेयरहाउस जांच में अनियमितताएं और माल की कमी सामने आई। इसके बाद समिति प्रभारी, वेयरहाउस संचालक और अन्य कर्मचारियों पर धोखाधड़ी व खरीदी घोटाले के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई।
किसानों का आरोप है कि जिन अधिकारियों को जांच सौंपी गई, उन्होंने ही आरोपियों से मिलीभगत कर किसानों को फर्जी बताने का षड्यंत्र रचा। इसी कारण करोड़ों रुपये का भुगतान आज तक अटका हुआ है, जिसका खामियाजा निर्दोष किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

ये किसान रहे मौजूद……………

इस दौरान अभय प्रताप सिंह, चंदन पटैल, मोनू सिंह, देवेंद्र ठाकुर, राम सिंह, बबलू ठाकुर, भगवान सिंह, जाहिरी पटैल, वीरेंद्र साहू, दुर्जन पटैल, दौलत सिलावट, हरेंद्र सिंह, विनोद नायक, इमरत पटैल, सूरज सिंह, भोला नवेरिया, सतीश विल्थरे, यशवंत सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।