अनियमित दिनचर्या से भड़कता है पित्त : प्रमाण सागर जी


जबलपुर। “स्वास्थ” का संबंध केवल तन से ही नहीं, बल्कि मन और चेतना से है” यदि हमने मन को साध लिया तो तन अपने आप स्वस्थ रहेगा” उपरोक्त उद्गार भावनायोग प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने डी.एन.जैन महाविद्यालय के विशेष पांडाल में”समग्र जीवन को संतुलित करने का मार्गदर्शन” देते हुये प्रातःकालीन धर्म सभा में व्यक्त किये। उन्होंने धर्म अर्थ काम, मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों की बात करते हुये कहा कि चारों के मूल में “आरोग्य” ही प्रमुख है,जिसका स्वस्थ शरीर इन्द्रियाँ संयत हों ,मन नियंत्रित हो तथा आत्मा प्रसन्न हो वह व्यक्ति स्वस्थ माना जाता है, मुनि श्री ने कहा जब बीमारी आती है, तो सबसे पहले तन पर प्रभाव पड़ता है, भावनाओं में विकृति तथा मन और विचार में परिवर्तन से शरीर के हार्मोन्स बिगड़ने लगते है,
जिससे विषाक्त रसायन उत्पन्न हो जाते है, मुनि श्री ने कहा कि “बीमारी की जड़ तन नहीं मन है” उन्होंने आजकल युवाओं की जीवन शैली पर प्रकाश डालते हुये कहा कि देर रात तक मोबाईल की रील देखने में तथा आधी दोपहर तक सोने की हो गई है अनिमियत दिनचर्या से पित्त भड़कता है, जिससे अनावश्यक क्रोध, भय और चिंता सताती है, इससे ब्लड प्रेशर, अलसर आदि रोग पनपते है,तथा नकारात्मक प्रवत्तियां हावी होती है, जिससे हमारा इंम्यूनिटी सिस्टम कमजोर हो जाता है, मुनि श्री ने बृह्म मुहूर्त में उठने के फायदे गिनाते हुये कहा कि यह साधना का काल कहलाता है, इससे स्मरण शक्ति मजबूत होती है उन्होंने कहा कि देर रात तक जागने से उनका सूरज 12 बजे होता है, तथा उनकी जिंदगी में भी हमेशा 12 ही बजते है, उन्होंने कहा कि जब तक आप अपने अंदर की विकृति को नहीं पहचानोंगे तब तक आपका शरीर स्वस्थ नहीं रह सकता। मुनि श्री ने प्रश्न किया? क्यों खाते हो तो उत्तर दिया कि मिल जाता है तो खाते है, अरे भाई माल भले ही दूसरे का है,लेकिन पेट तो तुम्हारा है! जीने के लिये खाते हो या खाने के लिये जी रहे हो? यह सवाल अपने आपसे पूछो मुनि श्री ने कहा कि गाड़ी में ईधन तभी डाला जाता है जब वह समाप्ति की और होता है, अपनी गाड़ी की तुम्हें चिंता है और जिंदगी की गाड़ी में जब चाहे जैसा चाहे जो मिला वह ईधन डालते रहते हो? मुनि श्री कहा कि”हमारे देश में भुखमरी से मरने वाले नगण्य है ज्यादा खाकर मरने वालों की संख्या ज्यादा है” भोजन पर संयम होना अनिवार्य है,भूख लगने पर ही भोजन करें तथा समय समय पर उपवास रखें। वैज्ञानिकों ने बताया उपवास रखने से केंसर जैसी बीमारी ठीक हुई है। मुनि श्री ने कहा कि आप किसके लिये धन कमाते हो जब रोटी ही चैन से न खा सको उन्होंने कहा कि असमय भोजन करने से आपकी आंतें कमजोर होती है। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुये कहा कि यदि आप स्वस्थ रहना चाहते हो तो रात्रि भोजन से बचो उसका परित्याग करो उन्होंने कहा आप सभी जैनी हो साथ में गुरुदेव के परम भक्त कहलाते हो उन्होंने कहा कि आजकल अजैन तो रात्रि भोजन छोड़ रहे है,और आप लोग रात्रि भोजन नहीं छोड़ पा रहे उन्होंने सुपर स्टार अक्षयकुमार का उदाहरण देते हुये कहा कि सभी लोग आज से तय कर लो कि हम रात्रि भोजन नहीं करेंगे। मुनि श्री ने कहा कि अपनी सेहत के लिये जागरूक होना चाहिये। इस अवसर पर मुनि श्री संधानसागर महाराज एवं समस्त क्षुल्लक मंचासीन थे। संचालन अमित पड़रिया ने किया।
मुनिसंघ के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी एवं सुवोध कामरेड ने बताया प्रवचन के पश्चात बाल ब्र.अभय भैया आदित्य ने टेलीग्राफ ग्राउण्ड रानीताल में आगमी 30 जनवरी से 6 फरबरी तक जबलपुर शहर में प्रथम बार संस्कृत भाषा में निवद्ध श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का भूमि पूजन कराया तथा मध्यान्ह में अहमदाबाद से आये निरंजन जी ने भारत सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के लिये चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी वर्कशॉप के माध्यम से दी| इस अवसर पर राष्ट्रीय दिगम्वर जैन युवा महासंघ तथा सकल दि. जैन समाज के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।