जबलपुर। “निर्वाण का अर्थ मृत्यु नहीं, देहभाव का अंत है,आत्म तत्व को जानकर संसार के ममत्व को छोड़ मोक्षमार्ग में लग जाने का नाम ही निर्वाण है” उपरोक्त उदगार मुनि प्रमाण सागर महाराज ने डीएन जैन महाविद्यालय के विशाल प्रांगण में बने प्रवचन पांडाल में भगवान ऋषभदेव के निर्वाण महामहोत्सव पर प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किये। मुनि श्री ने तीन शव्द निर्वाह, निर्माण, निर्वाण की व्याख्या करते हुये कहा कि”जहां केवल अपने हितों की ओर ध्यान दिया जाता है, वह निर्वाह है,और जहां अपने हितों के साथ साथ औरों के हितों का भी ध्यान रखा जाये वह निर्माण है, तथा आत्मतत्व को जानकर सारे ममत्व को छोड़ने का नाम निर्वाण है, मुनि श्री ने कहा कि वस्तु का अंधा उपभोग मनुष्य का पतन कराता है,वही आवश्यकता अनुरुप उपयोग उसके उत्थान का कारण वनता है,मुनि श्री ने भोगभूमी और कर्मभूमि की चर्चा करते हुये कहा कि भगवान ऋषभदेव ने मनुष्य को जीविका उपार्जन के लिये सबसे पहले षठकर्म का उपदेश देते हुये कृषि,
वाणिज्य, तथा शिल्पकला से अवगत कराया,तथा लोक व्यवस्था कायम कर उसके संस्थापक कहलाये, उन्होंने कहा कि जीवन का गुजारा ज्यादा मुश्किल नहीं है, जीवन का गुजारा तो पशुपक्षी भी कर लेते है, जीवन मूल्यों की प्रतिष्ठा को सिर्फ मनुष्य ही समझ सकते है,इसीलिए मनुष्य ही है जो जीवन की पूर्णतःको प्राप्त कर निर्वाण पद को प्राप्त करता है।
उन्होंने कहा कि भगवान ऋषभदेव की प्रतिष्ठा का उल्लेख अकेले जैन ग्रंथों में ही नहीं है,पौराणिक ग्रंथो, वौद्धग्रंथो,में भी मिलता है, भगवान ऋषभदेव को वैदिक ऋषियों तथा मुनिओं ने ऋग्वेद की 141 ऋचाओं में भगवान ऋषभदेव की स्तुति परख उल्लेख किया है,जिसमें उनके विराट व्यक्तित्व का उदाहरण दिया है मुनि श्री ने कहा कि आज हम सभी लोग यहां पर आदिनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव मना रहे है उन्होंने निर्वाण का अर्थ बताते हुये कहा कि “निर्वाण का अर्थ मृत्यु नहीं, देहभाव का अंत है” मत्युजंयी बनने की उपलव्धी है, जिसमें वासना और विकार को पूर्णता नष्ट किया जाता है। उन्होंने बोध, वैराग्य, संयम और सिद्धत्व ये चार बातें बताते हुये कहा कि भगवान ऋषभदेव की यात्रा बोध से सिद्धत्व तक की यात्रा है, यदि हम उनसे कुछ सीख पायें तो यह हमारे जीवन की बहूत बड़ी उपलब्धी होगी।
मुनिसंघ के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी एवं सुवोध कामरेड ने बताया मुनि श्री ने भावनायोग के माध्यम से सभी को कैलाश पर्वत का स्मरण कराते हुये निर्वाण लाड़ू चढ़वाया संचालन बाल ब्र अभय भैया आदित्य इंदौर ने किया संचालक अमित पड़रिया ने जबलपुर की जैन समाज की और से मुनि श्री से संस्कृत भाषा में लिपीवद्ध 1008 श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान कराने का अनुरोध किया गया।
जबलपुर के महापौर जगत बहादुरसिंग अन्नू ने मुनि श्री को श्रीफल भेंट किया एवं 31 जनवरी से प्रारंभ होने वाले 108 मंडलीय सिद्धचक विधान में पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया। दिगम्बर जैन युवा महासंघ द्वारा महापौर एवं राजेश सोनकर पूर्व नेता प्रतिपक्ष को सम्मानित किया।