मराठी साहित्य अकादमी एवं दत्त भजन मंडल के संयुक्त तत्वावधान मे आयोजित
मकर संक्रमण व्याख्यानमाला के समापन अवसर पर आज ११ भारतीय भाषाओं की तज्ञ विदुषी सुश्री मनीषा बाठे पुणे द्वारा “रामदासी उपासना” विषय पर बोलते हुए बताया कि, समर्थ रामदास की राम उपासना मनुष्य जीवन को पावन बनाती है.समर्थ रामदास महान क्रांतिकारी संत थे. तीन सौं उर्दू व अवधी मे श्लोक समर्थ रामदास ने लिखे है.तत्कालीन युगधर्म की पीडा को समझ कर उन्होने छत्रपती शिवाजी महाराज को राजनीति और अध्यात्म की शिक्षा प्रदान की. समर्थ संप्रदाय के लिए दासबोध ग्रंथ, एवं मनाचे श्लोक उपासना के लिए मान्य ग्रंथ है. मुगलो के आक्रमण के समय जब समाज हतबल था, तब समर्थ रामदास ने जनजागरण, राष्ट्रजागरण किया. समर्थ ने अपने आराध्य दैवत श्रीराम की भक्ति को व हनुमान की शक्ती को जन जन तक पोहोचाया. समर्थ द्वारा 36 हजार काव्यपंक्ती या लिखी गई है. जिसस मे दासबोध, आत्माराम, मनाचे श्लोक, करुणाष्टक, जुना दासबोध प्रसिद्ध है. उन्होने देशभर मे 1100 उपासना मठ, हनुमान मंदिर और आखाडे स्थापित किये
कार्यक्रम का शुभारंभ श्री शरद आठले,आभा गोरे द्वारा लोकमान्य तिलक की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ. अतिथी वक्ता का स्वागत डॉ. शिरीष जामदार,स्वाती गोडबोले श्रीमती,सदानंद गोडबोले
द्वारा श्रीफल एवं शाल से किया गया. मंच संचालन आभार प्रदर्शन नितीन देसाई ने किया. बाल तरुण समाज द्वारा संक्रांति के उपलक्ष मे तिळगुळ वितरण द्वारा कार्यक्रम की समाप्ती हुई.