जबलपुर। मराठी साहित्य अकादमी एवं दत्त भजन मंडल के संयुक्त तत्वावधान मे मकर संक्रमण व्याख्यानमाला के अंतर्गत आज वणी से पधारे डॉक्टर स्वानंद गजानन पुंड द्वारा भारतीय कथा विषय पर अपना उद्बोधन दिया गया. आपने बताया की बचपन मे हम जो कथायें नाना-नानी से सुनते थे उसका अर्थ हमे आज समझ मे आता है. भारतीय शिक्षण पद्धती में कथाओ के माध्यम से नीति मूल्य एवं संस्कार सिखाये जाते थे. आज परिवार बिखर रहे है उसका कारण संवाद की कमी है. कथायें परिवार को संघटित रखती थी. राष्ट्र की संप्रभुता अक्षय बनाने के लिए तथा चरित्र निर्माण के लिए महाभारत, रामायण, व पौराणिक कथाओं का वाचन मनन चिंतन आवश्यक है. आपने उदाहरण देकर समझाया की भगवती सीता द्वारा सुवर्ण मृग की कामना करना अवास्तविक और घातक सिद्ध हुआ. इसलिये जो वास्तविक नही है, उसके पीछे नही भागना चाहिए. कार्यक्रम का शुभारंभ मराठी अकादमी के निदेशक संतोष गोडबोले, विजय भावे, शरद आठले, विश्वास पाटणकर द्वारा दीप प्रज्वलन से किया. मुख्य वक्ता का स्वागत शिक्षण मंडल के अध्यक्ष डॉक्टर जयंत तनखीवाले द्वारा किया गया. मंच संचालन एवं आभार प्रदर्शन अभय गोरे ने किया. इस अवसर पर डॉक्टर स्वाती गोडबोले, अनिल राजूरकर दीपक उबाळे, मुरलीधर पाळंदे, संजय आपटे नितीन देसाई आदि गणमान्य लोक उपस्थित थे.