जबलपुर। सर्दियों के मौसम में प्रोटीन के नाम पर लोग ज्यादातर अंडे खा रहे हैं, ये अंडे सेहत के लिए खतरनाक भी हो सकते हैं| हाल ही में कर्नाटक की एक बड़ी कंपनी के अंडों में प्रतिबंधित एंटीबायोटिक नाइट्रोफ्यूरान के अवशेष पाए जाने से भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के निर्देश पर अब मध्यप्रदेश का खाद्य विभाग भी एक्शन मोड में आ गया है।
मध्यप्रदेश में अंडों की शुद्धता को लेकर बड़ी जांच शुरू हो गई है। दरअसल, कर्नाटक की एगोज कंपनी के अंडों की जांच रिपोर्ट में नाइट्रोफ्यूरान नामक दवा के अवशेष मिले हैं। यह दवा भारत समेत कई देशों में प्रतिबंधित है। इसके बाद एफएसएसएआई ने पूरे देश में अंडों की सघन जांच के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश के कई जिलों से अंडों की जांच………
खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने 8 जनवरी गुरूवार को खरगोन, रीवा और भोपाल समेत कई शहरों में छापामार कार्रवाई की। टीम ने अब तक 40 से अधिक नमूने एकत्र किए हैं। जबलपुर में भी सैंपलिंग की कार्रवाई हो सकती हैं| अकेले जबलपुर और उसके आसपास के दायरे में हर रोज ठंड के सीजन में 10 लाख अंडों की खपत होती हैं जो चिंता का विषय है। बहरहाल जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी, लिहाजा शहर में चिंता की ऐसी बात नहीं है ।
मुर्गियों को लगाए इंजेक्शनों से पहुंचता है ड्रग्स………..
विशेषज्ञों के अनुसार एंटीमाइक्रोबियल नाइट्रोफ्यूरान एक घातक ड्रग है, जो मुर्गियों में बीमारी को रोकने के लिए इंजेक्शन के रुप में दिया जाता है, कुछ मुर्गियों में इसके अवशेष अवशेष अंडों के जरिए इंसानों के शरीर में पहुंच जाते हैं। इस ड्रग की सबसे खतरनाक बात यह है कि यह केमिकल शरीर में जाकर टूटने की बजाय, शरीर में जमा होता रहता है, जो आगे चलकर कैंसर जैसी घातक बीमारियों को जन्म देता है। यह एक कृत्रिम (सिंथेटिक) दवा है, जिसका इस्तेमाल संक्रमण रोकने के लिए मुर्गी, मछली और झींगा जैसे जीवों पर किया जाता था। हालांकि, सेहत के लिए इसके खतरों को देखते हुए भारत समेत दुनिया के कई देशों ने खाने-पीने वाले जीवों पर इस दवा के उपयोग को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
सेहत पर गंभीर असर …………
विशेषज्ञों के अनुसार, नाइट्रोफ्यूरान युक्त अंडे खाने से लिवर और किडनी डैमेज होने का खतरा रहता है। यह पाचन तंत्र को बिगाडऩे के साथ-साथ इंसान के जीन पर भी बुरा असर डाल सकता है।