जबलपुर। चतुर्थ वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस, जबलपुर को अविस्मरणीय बनाने के उद्देश्य से भारतीय डाक विभाग, भारत सरकार द्वारा एक विशेष डाक आवरण का प्रकाशन एवं विधिवत विमोचन किया गया। यह विमोचन कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र के अवसर पर दिनांक 2 जनवरी 2026 को आयोजित हुआ था।
इस विशेष आवरण पर “वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस, जबलपुर” अंकित है। साथ ही इसमें डॉ. अखिलेश कुमार द्वारा रचित ग्रंथ हिम्न्स ऑफ रामायण के आवरण चित्र को भी स्थान दिया गया है, जो रामायण की वैश्विक चेतना और सांस्कृतिक प्रभाव को दर्शाता है।
कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र के दौरान इस विशेष आवरण की एक प्रति बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को आयोजन अध्यक्ष अजय बिश्नोई, आयोजन सचिव डॉ. अखिलेश गुमास्ता एवं फिला टेली सोसायटी के सचिव विकास सिंघई द्वारा प्रतीक स्वरूप भेंट की गई।
प्रभु श्री राम सांस्कृतिक मूल्यों के प्रतीक………….
भगवान राम के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि श्री राम भारत की एकात्मता की संस्कृति के सबसे बड़े प्रतीक हैं। उन्होंने जिस तरह का जीवन जिया, उसी से देश में सांस्कृतिक एकता आई। उन्होंने कहा कि राम का अर्थ उस परमात्मा से है जो हर जीव के भीतर मौजूद है, इसलिए हर व्यक्ति हमारे सम्मान का अधिकारी है। उन्होंने वाल्मीकि रामायण के उस प्रसंग का भी उल्लेख किया जहाँ वन गमन के समय लक्ष्मण के क्रोध को राम अपनी शांति और सेवा भाव से संतुलित करते हैं। राज्यपाल ने ‘दान’ और ‘गुरुदक्षिणा’ के महत्व को भारतीय परंपरा का मूल स्तंभ बताया। उन्होंने आयोजकों से सिफारिश की कि इस तरह की वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस देश के अन्य हिस्सों में भी आयोजित होनी चाहिए ताकि युवा पीढ़ी इन मूल्यों से जुड़ सके। उन्होंने अंत में कहा कि राजमत कभी जनमत को काट नहीं सकता, यही भारत की असली ताकत है। भारत ने एकात्मता और दिव्यता को 1948 में नहीं, बल्कि हजारों साल पहले ही स्वीकार कर लिया था।