जबलपुर। मध्यप्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में जबलपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक श्री लखन घनघोरिया ने राज्य सरकार की नीतियों, योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि विधानसभा के 70वें वर्ष में जहां प्रदेश को वर्ष 2047 के दूरदर्शी विजन पर केंद्रित चर्चा करनी चाहिए थी, वहीं सत्तापक्ष के सदस्य केवल अपना रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करने तक सीमित रहे और जमीनी सच्चाइयों से विमुख दिखाई दिए।
स्वास्थ्य सेवाओं में भारी अव्यवस्था……
विधायक घनघोरिया ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि राज्य में 19 शासकीय एवं 14 निजी मेडिकल कॉलेजों में कुल 5200 एमबीबीएस और लगभग 3500 पीजी सीटें उपलब्ध हैं, इसके बावजूद 3700 डॉक्टरों के पद रिक्त पड़े हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 800 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिना डॉक्टरों के संचालित हो रहे हैं, जबकि लगभग 65 हजार पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नए मेडिकल कॉलेजों के निरीक्षण के दौरान एक ही कॉलेज के डॉक्टरों को अन्य कॉलेजों के निरीक्षण में प्रस्तुत किया जाता है, जो पूरी व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है।
शिक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक विफलता………..
शिक्षा क्षेत्र पर बोलते हुए विधायक घनघोरिया ने कहा कि राज्य शिक्षा केंद्र पूरी तरह अधिकारी वर्ग द्वारा संचालित हो रहा है और शिक्षा मंत्री की भूमिका नाममात्र की रह गई है। प्राथमिक से आठवीं कक्षा तक के शासकीय विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है। अनेक विद्यालय ऐसे हैं जहां एक ही शिक्षक के भरोसे पूरी पढ़ाई संचालित की जा रही है और कई स्कूल बिना प्राचार्य के चल रहे हैं। उन्होंने कोविड काल के दौरान साइकिल, लैपटॉप और अन्य शैक्षणिक सामग्री वितरण योजनाओं में व्यापक अनियमितताओं की ओर भी सदन का ध्यान आकर्षित किया।
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में बिना तैयारी के कोर्स संचालन…
विधायक घनघोरिया ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर में बीएससी एग्रीकल्चर पाठ्यक्रम संचालित किए जाने पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि जब जबलपुर में पृथक कृषि विश्वविद्यालय उपलब्ध है, जिसके पास सैकड़ों एकड़ भूमि, अनुसंधान सुविधाएं और आधुनिक प्रयोगशालाएं हैं, तो बिना पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रयोगशालाओं और योग्य शिक्षकों के RDVV में यह पाठ्यक्रम शुरू करना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने यह भी कहा कि इसी तरह बीटेक पाठ्यक्रम भी बिना आवश्यक मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और सिविल इंजीनियरिंग सुविधाओं के संचालित किया जा रहा है, जिससे छात्रों को अमान्य अथवा फर्जी डिग्री मिलने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने विश्वविद्यालय में कुलगुरु की नियुक्ति पर भी व्यंग्य करते हुए कुलगुरु की योग्यता के लिए किसी का चेला होने की बात कही।
नगरीय निकायों की आर्थिक बदहाली………..
नगरीय विकास के मुद्दे पर विधायक घनघोरिया ने कहा कि नगर निगम और नगर पालिकाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है। चुंगी क्षतिपूर्ति, जो इन संस्थाओं की प्रमुख आय का स्रोत थी, बीते 16 वर्षों से न बढ़ाई गई और अब पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। वर्तमान में लगभग 75 प्रतिशत कर्मचारी आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत कार्यरत हैं और उनकी भविष्य निधि की कटौती का भुगतान तक नहीं किया जा रहा है। ठेकेदारी व्यवस्था के कारण सफाई व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा गई है। सफाई व्यवस्था के लिए प्रत्येक वार्ड में कम से कम 40 सफाई कर्मचारी नियुक्त करने और ठेकेदारी प्रणाली से मुक्ति दिलाने की मांग की। टैक्स वसूली के लिए प्राइवेट कंपनियों के ठेके बंद करने और मार्च से लागू होने वाले दोगुने संपत्ति कर को वापस लेने का सुझाव दिया। अमृत 2.0 जैसी योजनाओं को तत्काल धरातल पर उतारने और कर्मचारियों की भविष्य निधि की समस्या का तुरंत समाधान करने की अपील की।
संपत्ति कर दोगुना होने की आशंका………
विधायक ने चेतावनी देते हुए कहा कि आगामी मार्च माह से आम नागरिकों पर संपत्ति कर का बोझ दोगुना होने जा रहा है और इसकी वसूली के लिए निजी कंपनियों को ठेका दिया जा रहा है, जिससे जबरन वसूली और दादागिरी जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने सरकार से इस नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की।
भविष्य की दिशा पर सवाल………..
अपने संबोधन के अंत में श्री लखन घनघोरिया ने कहा कि प्रदेश सरकार को वर्ष 2003 की नीतियों और सोच से बाहर निकलकर वर्ष 2047 के भविष्य को ध्यान में रखते हुए काम करना चाहिए। केवल रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि जमीनी हकीकत को स्वीकार कर ठोस नीतिगत निर्णय लेने होंगे।