जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, क्रीड़ा भारती एवं प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय महाकोशल महाविद्यालय, जबलपुर के संयुक्त तत्वाधान में राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी विषय “खेल सृष्टि में भारतीय दृष्टि” का आयोजन शनिवार को महाविद्यालय के प्रेक्षागृह (हॉल) किया गया।
संगोष्ठी का उद्घाटन अशोक रोहाणी, विधायक, केंट, जबलपुर के मुख्य अतिथ्य में किया गया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रुप में प्रो. राजेश वर्मा, कुलगुरू, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर, बृजकांत, प्रातं प्रचारक, राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ, डॉ. पंजाबराव चंदेलकर, अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा विभाग, जबलपुर संभाग, कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. नरेन्द्र कोष्टी, सदस्य म.प्र. लोकसेवा आयोग, इंदौर, मुख्य वक्ता राज चौधरी, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, क्रीड़ा भारती, जनभागीदारी अध्यक्ष आशीष राव, प्राचार्य डॉ. अलकेश चतुर्वेदी, संगोष्ठी संयोजक डॉ. ज्योति जुनगरे उपस्थित रहे। सभी अतिथियों द्वारा सरस्वती पूजन एवं माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
मुख्य अतिथि अशोक रोहाणी ने इस अवसर पर कहा कि ऐसी संगोष्ठी भारतीय खेलों की पंरपरा पर चिंतन, शोध एवं भविष्य में हमारे खेलों का परिपक्व करेगी एवं आगामी समय में खिलाड़ियां को आगे बढ़ाने में प्रोत्साहित करेगी।
संगोष्ठी के द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता के रुप में राज चौधरी ने अपने वक्तव्य में कहा कि खेल केवल शारीरिक गतिविधि, योग या परेड नही है बल्कि विभिन्न खेलों का अभ्यास एवं खेलों के स्तर पर उच्चतम स्तर तक पहुचॉंना है। भीष्म सिंह राजपूत क्रीडा भारती सन् 1990 में स्थापित की गई जो आज तक विद्यार्थियों को विभिन्न खेलों के प्रति प्रोत्साहित कर रही है। डॉ. पंजाबराव चंदेलकर ने कहा कि खेल विज्ञान है जिसका संबंध एनाटोमी विषय से है खेल फिजियोथेरेपी है जो मेडिकल क्षेत्र से संबंधित है।
प्रो. राजेश वर्मा ने कहा कि हमारे शारीरिक, मानसिक, बौ़द्धक विकास एवं सामजिक नेतृत्व के लिए खेल अहम भूमिका प्रदान करता है। प्रो. विशाल बन्नै, प्रदेश समन्वयक, खेल सृष्टि में भारतीय दृष्टि ने कहा कि स्वस्थ्य सुधार में खेल अहम भूमिका रखता है।
डॉ. ज्योति जुनगरे ने बताया कि खेल मनुष्य के सर्वागीण विकास में सहायक है। प्राचार्य डॉ. अलकेश चतुर्वेदी ने कहा कि प्रत्येक खेल हमे नई सीख एवं प्रेरणा प्रदान करता है यह गर्व की बात है कि सन् 2036 में ओलम्पिक का आयोजन भारत में हो रहा है जिसमें पंरपरा खेलों को शामिल किया जायें। अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ. नरेन्द्र कोष्टी ने खेलों की महत्वता पर प्रकाश डाला। शोध नर्मदा पत्रिका प्रधान संपादक प्रो. अरुण शुक्ल ने बताया कि खेल सृष्टि में भारतीय दृष्टि के अंतर्गत भारत के अनेक पंरपरागत खेलों का समाहित किया गया है जो हमारे लिए बहुत ही उपयोगी एवं प्रेरणादायी है।
संगोष्ठी के तृतीय सत्र में प्रतिभागियों द्वारा शोध पत्र का वाचन किया गया। संगोष्ठी के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रुप में दिग्विजय सिंह, उपाध्यक्ष, म.प्र. ओलम्पिक संघ एवं डॉ. अल्का नायक विशिष्ट अतिथि के रुप में उपस्थित रहे। मंच संचालन डॉ. मलय वर्मा, डॉ. रमेश शुक्ला, डॉ. सुनील लखेरा द्वारा किया गया। संगोष्ठी में उपस्थित प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरण किया गया।
संगोष्ठी में डॉ. ज्योति जाट, डॉ. अजय शुक्ला, डॉ. आनंद डीके, राकेश त्रिपाठी, डॉ. प्रकाश विस्पुटे, सुश्री मधु यादव, प्रो. राकेश वाजपेयी, प्रो. सरद्ल सिंह संधु के साथ विभिन्न महाविद्यालय के सहभागी प्राध्यापक उपस्थित रहें।