शून्य काल में राज्यसभा सांसद सुमित्रा बाल्मीक ने उठाया मुद्दा, आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के बच्चों को 300 किमी दूर जाना पड़ता है परीक्षा देने


जबलपुर। राज्यसभा में मंगलवार को मध्यप्रदेश के जबलपुर और महाकौशल क्षेत्र से जुड़े एक गंभीर और जमीनी मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया गया।

जबलपुर की राज्यसभा सांसद सुमित्रा बाल्मीक ने शून्यकाल के दौरान ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को परीक्षा केंद्रों की दूरी के कारण होने वाली तकलीफों को सदन के सामने रखा।


सांसद ने कहा कि डिजिटल इंडिया के दौर में भी दूर-दराज के गांवों के बच्चों को जेईई, नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं देने के लिए 300 किलोमीटर तक की यात्रा करनी पड़ती है, जो किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है।


सांसद सुमित्रा बाल्मीक ने कहा कि महाकौशल के सिहोरा, कुंडम, शहपुरा, मझौली और कई आदिवासी-बहुल क्षेत्रों में रहने वाले गरीब परिवारों के बच्चों के लिए राष्ट्रीय परीक्षाएं देना आर्थिक और मानसिक रूप से बेहद कठिन हो गया है।


उन्होंने सदन में कहा, यहाँ से 300 किलोमीटर दूर भोपाल या इंदौर में परीक्षा केंद्र मिलता है। उस 17 साल के बच्चे की हालत सोचिए, जिसे परीक्षा से पहले रात भर बसों में धक्के खाने पड़ते हैं। उसे परीक्षा की नहीं, धर्मशाला मिलने की चिंता होती है।

सांसद ने यह भी कहा कि कई माता-पिता दो दिन की दिहाड़ी छोड़कर अपने बच्चे को परीक्षा दिलाने जाते हैं। ऐसे में परीक्षा देना गरीबों के लिए ‘आर्थिक संकट’ जैसा बन जाता है।

डिजिटल इंडिया के बीच बड़ा विरोधाभास…

बाल्मीक ने संसद में यह सवाल भी उठाया कि , जब देश के गांव-गांव तक 5जी और तेज इंटरनेट पहुंच चुका है, जब हर प्रक्रिया ऑनलाइन हो रही है, ऐसे में बच्चों को परीक्षा देने के लिए इतनी दूर क्यों भेजा जा रहा है?

उन्होंने कहा फॉर्म भरने की प्रक्रिया ऑनलाइन करने से लोकतंत्र मजबूत हुआ, लेकिन परीक्षा केंद्रों की कमी ने इसे फिर अमीरों तक सीमित कर दिया है।

वन ब्लॉक, वन डिजिटल एग्जाम सेंटर …

सुमित्रा बाल्मीक ने शिक्षा मंत्रालय और एनटीए से मांग की हर ब्लॉक में एक डिजिटल परीक्षा केंद्र स्थापित किया जाए।

उन्होंने इसके लिए तीन मजबूत तर्क रखे हर ब्लॉक में सरकारी स्कूल, आईटी रूम, पंचायत भवन जैसे संसाधन उपलब्ध हैं, जिन्हें सुरक्षित डिजिटल परीक्षा केंद्र में बदला जा सकता है।

यदि लोकतंत्र के लिए ईवीएम मशीनें जंगलों तक ले जाई जा सकती हैं, तो देश के भविष्य बनाने वाले बच्चों तक कंप्यूटर क्यों नहीं पहुंच सकता? रिमोट प्रॉक्टरिंग तकनीक उपलब्ध है, इसलिए 300 किमी यात्रा कराने का कोई तर्क नहीं बनता।

वंचित समाज के लिए शिक्षा ही हथियार …

सांसद ने भावुक अपील करते हुए कहा, “असमानता से लड़ने का एकमात्र हथियार शिक्षा है। सरकार ऐसी व्यवस्था करे जिससे छात्र की ऊर्जा परीक्षा पास करने में लगे, परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में नहीं।

”अंत में उन्होंने सरकार से इस दिशा में ठोस नीति बनाने और ग्रामीण-अंचल के छात्रों के लिए परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता को आसान करने की मांग की।