
*जबलपुर* आज मंगलवार को ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसे लोगों ने अपनी-अपनी गाड़ियां रोककर देखा। कमलेश पाठक ने अपनी नवजात बेटी को अस्पताल से लेकर घर तक इस तरह लेकर पहुंचे कि रास्ते में जिसने भी देखा, बस देखते रह गए। सफेद कलर की कार, जो कि बैलून से सजी हुई थी। आगे लिखा हुआ था गर्ल…।
कुछ लोगों ने उन्हें रोककर कार सजाने की वजह पूछी, तो उन्होंने मुस्कराकर कहा कि मेरे घर बेटी हुई है,उसी का जश्न मना रहे है। कमलेश की नवजात बेटी की सवारी लेडी एल्गिन अस्पताल से व्हीकल स्टेट तक लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही।
*- बेटी है तो सब कुछ है* पिता ने बोला
पेशे से फोटोग्राफर कमलेश पाठक की पत्नी ने 18 नवंबर को लेडी एल्गिन अस्पताल में बेटी को जन्म दिया। पैदा होते ही, तबीयत बिगड़ी तो नवजात को एचएनसीयू में रखा गया। पूरी तरह से स्वस्थ्य होने के बाद मंगलवार को जब अस्पताल से छुट्टी की गई तो पत्नी को सरप्राइज देते हुए बैलून से सजाकर कार अस्पताल लेकर पहुंचे और फिर लेकर आए।
कमलेश का कहना है कि मेरी दो बेटी हैं। मुझे नाज है, कि मैं बेटियों का पिता हूं। बच्ची को इस तरह से घर ले जाने का अर्थ यह है कि जो लोग समझते है, कि बेटी नहीं बेटा जरूरी है, यह उनको दिखाने के लिए कर रहा हूं, कि बेटी है तो सब कुछ है। उनहोंने ने बताया कि उनकी दो बेटी है, बड़ी 2 साल की है, जिसका नाम कात्यायनी है और दूसरी का नाम शुभांगनी रखा है।
*बेटा होता तो ऐसा नहीं करता*
कमलेश का कहना है कि शुरू से सोचकर रखा था कि बेटी होगी तो कुछ ऐसा करूंगा कि लोग भी देखें और समझे कि बेटी बेटे से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि अगर शुभांगनी की जगह बेटे ने जन्म लिया होता तो शायद इस धूमधाम से लेकर नहीं जाता। उनका का कहना है कि कहने को तो लेडी एल्गिन सरकारी अस्पताल है, पर प्राइवेट से कम नहीं। जन्म के समय बच्ची की तबीयत बिगड़ गई थी, पर इलाज अच्छे से हुआ और आज वह पूरी तरह से ठीक है।