जबलपुर| जबलपुर में आवारा श्वानों की समस्या गंभीर जनसंकट का रूप ले चुकी है। नेशनल हेल्थ मिशन की रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 में शहर में 13 हजार 619 लोग डॉग बाइट का शिकार बने, जो यह दर्शाता है कि स्ट्रीट डॉग्स का खतरा अब सड़कों से आगे बढ़कर अस्पताल, स्कूल और रिहायशी इलाकों तक पहुंच चुका है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में आवारा पशुओं को नेशनल और स्टेट हाईवे से हटाने और अस्पताल, स्कूल-कॉलेज परिसरों में सुरक्षा घेरा लगाने के आदेश के बाद भी शहर में हालात जस-के-तस हैं।
मध्यप्रदेश में स्ट्रीट डॉग्स की आबादी 10 लाख के पार पहुंच चुकी है, जिसमें अकेले इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर सहित 5 बड़े शहरों में 6 लाख से अधिक आवारा श्वानों हैं।
अस्पतालों से स्कूल तक, हर जगह श्वानों का जमावड़ा …
मेडिकल कॉलेज, विक्टोरिया अस्पताल, जिला अस्पताल के आसपास और शहर के कई विद्यालय-कॉलेज परिसर में श्वानों के झुंड आम दिखाई देते हैं।
शहर के रिहायशी इलाकों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और बाजार क्षेत्रों में भी आवारा श्वानों की सक्रियता बढ़ने से नागरिकों में दहशत का माहौल है।
नसबंदी के बाद भी समस्या जस की तस …
सूत्रों के अनुसार श्वानों की नसबंदी प्रक्रिया तो की जा रही है, लेकिन ऑपरेशन के बाद श्वानों को फिर उसी इलाके में छोड़ दिया जाता है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था।
यही कारण है कि नसबंदी के बावजूद हमलों और आक्रामकता में कोई कमी नहीं आई है। वहीं नसबंदी के नाम पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगते रहे हैं, जिसमें दावा किया गया की नसबंदी कागजों में हो रही है, हकीकत में श्वानें आजाद हैं.
मौसम बदलते ही आक्रामक हो रहे श्वानें ..
पशु विशेषज्ञों के मुताबिक ठंड में ब्रीडिंग सीजन होने से मादा श्वाने ज्यादा आक्रामक हो जाती हैं. गर्मी में शरीर का ताप संतुलित न कर पाने से वे चिड़चिड़े और हिंसक व्यवहार करते हैं.
भोजन की कमी, वैक्सीनेशन न होना और नसबंदी का सीमित असर भी हमलों की बड़ी वजह है.
शहर में तत्काल सख्त कदम उठाना जरूरी……
नागरिक सुरक्षा को देखते हुए विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि नगर निगम और जिला प्रशासन एक साथ मिलकर इस दिशा में व्यापाक अभियान चलाएं. स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों में सुरक्षा बाड़ लगाई जाए.
नसबंदी के बाद श्वानों की मॉनिटरिंग हो, री-लोकेशन नीति बने. शहर में रैबीज वैक्सीनेशन अभियान तेज किया जाए. कचरा प्रबंधन सुधारकर भोजन स्रोत नियंत्रित किए जाएं.
नगर निगम रेस्क्यू टीम सक्रिय करे……
जानकारों का कहना है की जबलपुर में 13 हजार से अधिक डॉग बाइट के मामले साबित करते हैं कि आवारा श्वानों का मुद्दा अब केवल पशु नियंत्रण की चुनौती नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा का गंभीर संकट बन चुका है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब जरूरत है कि योजनाएं सिर्फ कागज़ों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी स्तर पर कड़े और प्रभावी कदम उठाए जाएं।