जबलपुर,। मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ जबलपुर ने मुख्यमंत्री म.प्र.शासन एवं मुख्य सचिव म.प्र. शासन के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा एक अन्य मामले में दिए गए निर्णय की आड लेकर शिक्षकों को प्रताड़ित करने का एक और बहाना शिक्षा विभाग के आला अफसर को मिल गया है, लोक शिक्षण संचालक भोपाल द्वारा विधि सम्मत पालन किए बगैर एक आदेश जारी किया है जिसमें 30 वर्ष की सेवा करने वाले शिक्षकों को यदि आगे नौकरी करना है तो शिक्षक पात्रता परीक्षा देना ही होगा। संचालक लोक शिक्षण के इस आदेश से शिक्षकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। मध्य प्रदेश के समस्त अध्यापक माध्यमिक शिक्षक तथा प्राथमिक शिक्षक अपनी प्रथम नियुक्ति शिक्षा कर्मी एवं संविदा शिक्षक से होते हुए आए हैं, जो की सेवा में निरंतर है।
उपरोक्त भर्ती न्यायालय के निर्णय के अधीन विधिवत शासन आदेश पर भर्ती नियम 1998, 2008 एवं 2018 में वर्णित सभी सेवा शर्तों में इस तरह की टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) परीक्षा को उत्तीर्ण करना राज्य शासन स्कूल शिक्षा विभाग, आदिम जाति कल्याण विभाग अथवा मध्य प्रदेश शासन के किसी विभाग द्वारा उल्लेख नहीं किया गया है। उच्चतम न्यायालय के निर्णय के पश्चात् प्रदेश के शिक्षक संवर्ग में भय एवं रोष का वातावरण बना हुआ है।
मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के अटल उपाध्याय, देवेन्द्र पचौरी आलोक अग्निहोत्री, ब्रजेश मिश्रा, रजनीश पाण्डे, मुकेश सिंह, शहजाद सिंह द्विवेदी, दालचंद पासी, गगन चौबे, प्रियांशु शुक्ला, विनय नामदेव, विवेकरंजन शुक्ला, रामशंकर शुक्ला, सुनील पचौरी, गणेश उपाध्याय, श्यामनारायण तिवारी, ममता दुबे, रीता खण्डेलवाल, सुनीता घंगोरिया, सरिता यादव, अल्का कोरी, शिखा सिह. सुनीता शुक्ला, सविता कुरील, अर्चना राजपूत, ज्योति तेलगांव, सुरेन्द्र जायसवाल, विवके जैन, दीपक सोनी, रामदास बरकडे, शुभसंदेश सिंगौर, अंशुल साहू, बृजेश दीक्षित, अजय दुबे, सतीश उपाध्याय, राजेश चौरसिया, मनोज सिंग, प्रदीप मिश्रा, किशोर दुबे, सुरेन्द्र चौबे, जयप्रकाश गुप्ता, जे एल झारिया, प्रमोद विश्वकर्मा, बृजेश दुबे, सुरेंद्र चौधरी आदि ने मुख्यमंत्री से उपरोक्त आदेश को संज्ञान में लेकर शिक्षकों को राहत दिलाने की मांग की है।